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कर्मचारियों को नहीं तो जनप्रतिनिधियों को क्यों मिले पेंशन

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कचहरी में चुनाव पर चर्चा करते अधिवक्ता ।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने कचहरी पर अधिवक्ताओं से चुनाव पर चर्चा की। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब उम्र भर काम करने वाले कर्मचारियों की पेंशन खत्म की जा रही है। तो पांच साल के लिए चुनने वाले जनप्रतिनिधियों को उम्र भर पेंशन क्यों दी जाए? खुद विधायकों को ही इसकी आवाज उठानी चाहिए। साथ ही कहा कि एटा के तमाम बड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाकर समाधान कराने की क्षमता वाला विधायक होना चाहिए।
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अधिवक्ता अवधपाल सिंह सोलंकी ने कहा विधायक ऐसा हो जो विस में पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन के खिलाफ आवाज उठा सके। यह पुरानी व्यवस्था अब समाप्त होनी चाहिए। अधिवक्ता रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि विधायक ऐसा हो जो क्षेत्र का विकास कर सके और सक्रिय रहकर अपनी भूमिका को निभाए। मतदाताओं के भरोसे को कायम रखते हुए जरूरी व्यवस्थाओं पर काम करे। अधिवक्ता हरेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक पढ़ा-लिखा होना चाहिए।
युवाओं की बात को विस में रखने वाला और क्षेत्र में विकास कराने वाला हो। अधिवक्ता नरेश यादव ने कहा कि विधायक शिक्षित होने साथ-साथ जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाला हो। तभी जनता की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने कहा कि विस में मुद्दे उठाने वाला विधायक हो और विकास कराने वाला हो। अधिवक्ता दयाराम उपाध्याय ने कहा विधायक पढ़ा लिखा हो, क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने वाला हो। जाति-पांत और पार्टी की राजनीति से हटकर विकास की बात करने वाला हो।
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