उत्तर प्रदेश के एटा में एक ओर वैष्णों देवी यात्रा के लिए घर में तैयारियां चल रहीं थीं, तो दूसरी ओर होनहार बेटी नीट की परीक्षा के लिए जी जान से जुटी थी। परिजन उसे चिकित्सक बनते देखना चाहते थे, लेकिन एक झटके में उनके सपने उजड़ गए और तैयारियां धरी रह गईं। न जाने क्या हुआ कि किसी से बिना कुछ कहे-सुने बेटी ने मौत को गले लगा लिया। सोमवार शाम को हुए पोस्टमार्टम में भी मौत की वजह फंदे पर लटकना बताई गई है।
बताया कि 12 अप्रैल को जन्मदिन आ रहा था, लेकिन नवरात्रि की वजह से कह दिया था कि कुछ खास नहीं करेंगे। घूमने की शौकीन थी। फरवरी में अपने माता-पिता के साथ मेघालय, दार्जिलिंग आदि जगह घूमकर आई थी। 19 अप्रैल को वैष्णों देवी के लिए सभी का रिजर्वेशन कराया था। इसके लिए घर में तैयारियां की जा रहीं थीं।
बताया कि बेटी बहुत बहादुर थी, कुछ भी आभास न था कि ऐसा कदम उठा सकती है। किसी तरह की समस्या, शिकायत, पढ़ाई का दबाव आदि को लेकर कुछ भी नहीं कहा। जबकि रोज ही पिता से एक दोस्त की तरह उसकी बात होती थी। अगर कुछ होता तो अपने पिता को जरूर बताती। सोमवार की सुबह भी सबसे हंस-बोलकर बातचीत हुई। समझ में नहीं आता कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।