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घुंघरू की झनकार पर मार, कोयले की महंगाई ने बढ़ाई लागत

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जलेसर में एक कारखाने में पीतल उत्पाद तैयार करते कारीगर। संवाद - फोटो : ETAH
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एटा/जलेसर। जलेसर के मशहूर घुंघरू की झनकार पर महंगाई की मार पड़ी है। कोयले के दाम 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इससे पीतल उत्पादों को तैयार करने की लागत भी बढ़ी है। जबकि मजदूरी में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में कारखाना संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
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जलेसर में घुंघरू, घंटी, घंटे आदि पीतल उत्पाद बनाने के छोटे-बड़े मिलाकर सामान्य तौर पर करीब 1000 कारखाने संचालित होते हैं। गैस की उपलब्धता न होने के कारण इनमें भट्ठियां पारंपरिक रूप से कोयले से ही जलाई जाती हैं। अक्तूबर में कोयला संकट के बीच इसके दाम में भी इजाफा हुआ। यहां के कारखाना संचालक अलीगढ़ से कोयला लेते हैं। अक्तूबर से लेकर अब तक तीन बार दाम बढ़े, जो 35 से बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। जबकि तैयार माल की खरीद में मामूली बढ़ोतरी हुई है। जिसके चलते मुनाफा बेहद कम रह गया और छोटा उत्पादन करने वाले करीब 100 वाले कारखाने बंद हो गए। अधिकांश लोग बड़े कारखानों में मजदूरी कर रहे हैं।
पांच रुपये प्रति किलो बढ़ी लागत
एक भट्ठी पर औसतन प्रतिदिन 250 से 300 किलो प्रतिदिन तैयार होता है। कोयला महंगा होने से प्रति किलो पांच रुपये तक की लागत बढ़ गई है। जबकि खरीद उस अनुसार नहीं बढ़ी है।
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