एटा। जलेसर के तकरीबन दस हजार लोग हैं जो घुंघरू घंटी कारोबार से जुड़े हैं। पुरानी कर प्रक्रिया वैट के अंतर्गत यह कारोबार कर मुक्त था, लेकिन जीएसटी आने पर 18 फीसदी का कर अधिरोपित कर दिया गया। हालांकि बाद में संशोधन कर इसे 12 फीसदी किया गया। लेकिन कर की वजह से कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
जिले को पूरे देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले इस कारोबार को कर मुक्त किए जाने के प्रावधान बजट में लाने की मांग कारोबारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि नोटबंदी, जीएसटी और कोरोना के चलते जलेसर का हस्तशिल्प हाशिये पर आ गया है। सरकार चाहे तो इसे कर में छूट देकर जान फूंक सकती है।