एटा। मई में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते जनमानस के साथ ही पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। ऐसे में दुधारू पशुओं को लेकर पशुपालक चिंतित नजर आ रहे हैं। गोवंश हो या अन्य पशु सभी को गर्मी ने बेहाल कर रखा है। इससे दूध की मात्रा पर भी असर पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है पशुओं को धूप में ज्यादा समय तक न रखें और गर्म पानी भी पिलाने से बचें। शुक्रवार को गर्मी का पारा चढ़कर 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं न्यूनतम पारा 29 डिग्री सेल्सियस तक रहा। इसके चलते पशु-पक्षी गर्मी से बेहाल रहे। वह बीमारी का शिकार होने लगे हैं। दुधारू पशुओं का दूध कम हो गया है। बढ़ती गर्मी को लेकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पशुपालक किसान पशुओं को हमेशा ताजा पानी पिलाएं। गर्म या ज्यादा समय से रखे हुए पानी को न पिलाएं। भूसा खिलाने पहले उसको एक घंटे पहले पानी में भिगो दें। चारा लगाते समय थोड़ा सा खाने वाला सोडा चारे में मिला दें, जिससे वह पशु आसानी से पचा लेगा। दलिया, दाल खिलाते हैं तो सुबह सूर्योदय से पहले खिला दें। ऐंठी हुई चरी को न खिलाएं, इससे पशु को अफरा या अपच की शिकायत हो सकती है।
-
गर्मी व हीटवेव चलने से दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा असर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि जिस प्रकार से गर्मी बढ़ रही है, उससे पशु के दूध देने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। इसलिए पशुओं को सुबह शाम नमक और गुड़ भी खिलाएं, जिससे पशु को प्यास लगेगी और पानी पिएगा तो गर्मी से राहत मिलेगी। विशेष रूप से शंकर, जर्सी या अन्य प्रकार के पशुओं को गर्मी ज्यादा लगती है। इससे बचाव के लिए पशुओं को धूप में न बांधें।