एटा। शासन की ओर से किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी के तहत जिले के चार आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) को सक्रिय किया गया है। यहां वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद)तैयार की जा रही है। यह किसानों को कम दामों पर मिलेगी। इससे पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा।
प्रभारी डीपीआरओ श्वेता सिंह ने बताया कि जिले के कुछ अन्य मजरों के केंद्रों पर भी जैविक खाद तैयार की जा रही है। जैथरा, सकरौली, खिरिया नगरशाह, वाहुपुर के केंद्रों पर उत्पादन सर्वाधिक है। यहां तैयार की जा रही वर्मी कंपोस्ट व जैविक लिक्विड फर्टिलाइजर किसानों को सस्ती दरों पर उपलब्ध होगी। इन केंद्रों पर केंचुआ आधारित खाद तैयार की जा रही है। यह मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बढ़ाती है। फसल की पैदावार दोगुनी करने में सहायक होती है।
केंद्रों पर उत्पादित खाद 20 रुपये प्रति किलो की दर से किसानों को दी जाएगी। केंचुआ खाद 200 रुपये व जैविक लिक्विड फर्टिलाइजर 50 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल से फसल की लागत में कमी आएगी। रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी। प्रभारी डीपीआरओ ने बताया कि जैविक खाद से मिट्टी की सेहत सुधरती है और लंबे समय तक खेती के लिए उपजाऊ बनी रहती है।