एटा। जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 1.70 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। यहां दो महीने से यूजर चार्ज के रूप में आने वाला एक भी रुपया जमा नहीं किया गया है। जांच में ब्लड बैंक के पांच कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है।
जिले के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक संचालित है। सभी जरूरतमंद लोग यहां से रक्त प्राप्त करते हैं। रक्त लेने के लिए संबंधित लोगों को रक्त देने की अनिवार्यता तो है ही, साथ ही यूजर चार्ज देना होता है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए यह निशुल्क है। वहीं निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए यूजर चार्ज के रूप में 1050 रुपये जमा करने होते हैं।
यूजर चार्ज से एकत्रित धनराशि को ट्रेजरी में जमा कराया जाता है लेकिन मई और जून में इस खाते में कोई धनराशि जमा नहीं कराई गई। मामला जानकारी में आने के बाद तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच कराई गई। डॉ. मधुप कौशल, डॉ. एस. चंद्रा और डॉ. राहुल वार्ष्णेय की टीम ने जांच पूरी कर ली है। इसमें पाया है कि इन दो माह में 1600 से अधिक रक्त यूनिट बाहरी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दिया गया। इनसे यूजर चार्ज प्राप्त कर रसीदें भी काटी गईं लेकिन रसीदों के आधार पर करीब 1.70 लाख रुपये जमा नहीं कराया गया।
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ब्लड बैंक में यूजर चार्ज की गड़बड़ियों की शिकायत संज्ञान में आई थी। जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। अभी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेश अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल