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भक्ति ही कर्मबंधन से मुक्ति का एकमात्र उपाय: विमर्श सागर महाराज

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पुरानी बस्ती स्थित बड़े जैन मंदिर में शांतिधारा अभिषेक और भक्तांबर विधान में सम्मिलित श्रद्धाल? - फोटो : ETAH
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एटा। शहर के पुरानी बस्ती स्थित बड़े जैन मंदिर में विराजमान जैन आचार्य विमर्श सागर महाराज ने शनिवार सुबह 6 बजे भगवान की शांतिधारा अभिषेक विधिपूर्वक संपन्न कराई। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि कर्मबंधन से मुक्ति का एकमात्र उपाय भक्ति ही है।
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शांतिधारा के बाद जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ और भक्तांबर विधान का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालु संगीत एवं भजनों पर भक्तिमय नृत्य करते हुए नजर आए। महाराजजी ने कहा कि मनुष्य जीवन में सुख और दुख, धूप और छांव की तरह आते-जाते रहते हैं। मनुष्य को अपने पाप-पुण्य के अनुसार धूप और छांव की तरह अनुकूलता और प्रतिकूलता प्राप्त होती है। मनुष्य इसमें राग-द्वेष करके जीवन भर कर्मबंधन करता रहता है और स्वयं को दुख में डालता रहता है।
कर्म काटने के लिए एकमात्र जिनेंद्र भगवान की भक्ति ही साधन है। मन, वचन, काया तीनों योगों से जिनेंद्र भगवान की भक्ति में संलग्न रहना चाहिए। प्रवचन के बाद शाम के समय गुरु भक्ति का आयोजन किया गया। विधानकर्ता राजीव जैन, ब्रह्मचारणी विशु, नेहा, अध्यक्ष योगेश जैन, उपाध्यक्ष निर्मल जैन, मंत्री पंकज जैन, सचिन जैन टीटू, ऋतु जैन, निष्ठा जैन, सोनल जैन, आयुषी जैन मौजूद रहे।
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