जीटी रोड स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक में भर्ती मरीज। संवाद
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एटा। डेंगू और बुखार से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। सरकारी ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी सभी मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। इन सब हालातों का ठीकरा आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसियेशन) ने सरकारी व्यवस्थाओं पर फोड़ा है। संगठन ने तो सीधे तौर पर कहा है कि डेंगू जिले में महामारी का रूप ले चुका है। मरीज इतने ज्यादा हैं कि रात-दिन काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय रहते तैयारी की जाती तो ऐसे विकराल हालात नहीं बनते।
जिला महासचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि हर साल अगस्त से अक्तूबर में डेंगू और मलेरिया फैलता है। हमारे पास भरपूर समय होता है और इसे आसानी से रोका जा सकता है, लेकिन अंत समय तक ध्यान ही नहीं दिया गया। डेंगू को फैलने से रोकना आसान है, लेकिन एक बार फैलने पर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल हो जाता है। यही हालात अब बन गए हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड नहीं है, मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
आईएमए के सुझाव
- अलग-अलग वार्डों में अभियान न चलाकर, हफ्ते में एक या दो वार्ड पर काम किया जाए। इसमें सक्शन मशीन से जलभराव खत्म किया जाए। सफाई और फॉगिंग कराई जाए। महीने में इस तरह के दो चक्र हों।
- रेडक्रॉस सोसायटी की धनराशि से 25 फॉगिंग मशीनें खरीदी गईं थीं। रोस्टर बनाकर गांवों में फॉगिंग कराई जाए।
- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की बैठकों में आईएमए और निजी चिकित्सकों को भी शामिल कर सुझाव-सहयोग लिया जाए।
- सरकारी सिस्टम के साथ ही जागरूकता के लिए जनप्रतिनिधियों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाए। सांसद, विधायक आदि लोगों को जागरूक करें।
- झोलाछापों से हालात ज्यादा बिगड़ रहे हैं, उन पर कड़ाई से अंकुश लगाया जए।
- घर-घर सर्वे कराकर, बुखार के रोगियों को चिह्नित किया जाए।