एटा। जिले में पिछले 36 घंटों से जारी रुक-रुक कर बारिश ने जनजीवन और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम के इस उतार-चढ़ाव से शहर में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में कच्चे रास्तों की स्थिति खराब हो गई है। वहीं खेतों में तैयार खड़ी फसल के खराब होने की आशंका से अन्नदाता गहरे संकट में हैं।
दो दिन से लगातार हुई बारिश के बाद रविवार को सुबह से ही बूंदाबांदी जारी रही। दोपहर बाद बादल साफ हुआ और तेज धूप निकली लेकिन बादलों को आवाजाही जारी रही। रविवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री व न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके कारण कई मोहल्लों और प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनी रही। निचले इलाकों में पानी भरने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। जगह-जगह कीचड़ होने से भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों की स्थिति भी खराब हो गई है।
लगातार बारिश से किसानों की चिंता सबसे अधिक बढ़ गई है। खेतों में खड़ी धान, बाजरा और अन्य फसलों पर बारिश का असर पड़ा है। कई स्थानों पर फसलें खेतों में बिछ गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो खेतों में पानी भरने से फसलों को और नुकसान हो सकता है। तैयार फसल के खराब होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
बाजारों में भी इसका असर दिखाई दिया और सामान्य दिनों की अपेक्षा चहल-पहल कम रही। किसानों ने प्रशासन से जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। वहीं ग्रामीण इलाकों में क्षतिग्रस्त रास्तों और नालियों की सफाई कराने की जरूरत भी जताई गई है। मौसम साफ होने के बाद ही फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन हो सकेगा।
फिलहाल एक दो दिन बादलों की आवाजाही जारी रहेगी। जल्द मौसम सामान्य होने का अनुमान है। किसान अपने खेतों में रुके हुए पानी को नालियां बनाकर निकालें जिससे फसलों को नुकसान न हो। -एसके सिंह, कृषि विज्ञान अवागढ़ केंद्र प्रभारी
रविवार को होती बूंदाबांदी व शहर के निधौली रोड पर हुआ जलभराव। संवाद