एटा। तीन लोगों को बिजली कनेक्शन दिए बिना ही हजारों रुपये का बिल बना दिया गया। नहीं दिया तो आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर जबरन वसूली करा ली। तीनों उपभोक्ताओं ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। वसूली गई धनराशि को ब्याज सहित वापस करने का आदेश अदालत ने दिया है।
ऊसर भूमि सुधार योजना के तहत सकीट ब्लॉक के गांव लभैटा निवासी रामसेवक, नरायन सिंह और सियाराम ने 1995 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया। मुकदमे के अनुसार विभाग ने ट्रांसफॉर्मर, खंभे लगवाए और न इन लोगों को कनेक्शन दिए। जबकि बिल लगातार भेजते रहे। इस संबंध में इन लोगों ने विभागीय अधिकारियों को शिकायतें भी कीं। जब इन लोगों ने बिल का भुगतान नहीं किया तो विद्युत विभाग ने आरसी जारी की। 2016 में 89702, 60708 और 67271 रुपये बिल का जबरन भुगतान करा लिया। इसके खिलाफ तीनों ने स्थायी लोक अदालत में 2019 में मुकदमा दायर किया।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा, सदस्य नवनीत पचौरी व गिरीश चन्द्र की पीठ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निस्तारण किया है। विद्युत विभाग को 30 मार्च 2016 से 6 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ रुपये तीनों को वापस करने का आदेश दिया है। इसके लिए विभाग को दो महीने का समय दिया है। यदि विभाग समय से भुगतान नहीं करता है तो 7 प्रतिशत की ब्याज दर लागू कर दी जाएगी।
उपभोक्ता फोरम के आदेश को नहीं माना
इससे पहले तीनों लोगों ने जिला उपभोक्ता आयोग में भी गुहार लगाई थी। यहां भी विद्युत विभाग की कमी और मनमानी साबित हुई। आयोग ने बिलों को निरस्त कर रुपये लौटने का आदेश दिया था लेकिन विभाग ने इस आदेश का पालन नहीं किया।