एटा। संसद में राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह ने गायों की नस्लों को लेकर सवाल उठाया। पूछा विदेशी नस्ल की गायों की प्रजनन क्षमता, दूध उत्पादकता और गुणवत्ता आदि का क्या ब्योरा है। देसी गाय की नस्ल विकसित करने के लिए सरकार क्या कर रही है? इस पर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने जवाब दिया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार भारतीय गायों की नस्लें बेहतर प्रजनन करती हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी नस्ल की गाय दो से तीन बार ही दूूध देती हैं। जबकि अधिकांश भारतीय नस्ल की गाय उन्हीं परिस्थितियों में चार बार दूध देती हैं। जिनकी संख्या 80 प्रतिशत है। जबकि तीन प्रतिशत गाय 9 या इससे ज्यादा बार दूध देती हैं। पशुपालन मंत्री ने बताया कि भारतीय नस्ल की गाय के दूध में वसा और कुल ठोस सामग्री का प्रतिशत विदेशी पशु के दूध की तुलना में ज्यादा होता है। मंत्री ने बताया कि पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा देसी नस्लों के विकास एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन का कार्यान्वयन किया जा रहा है। यह देसी नस्लों सहित अधिक दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। संवाद