एटा। कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा से किसान संगठनों में संतोष है। उनका कहना है कि यह फैसला किसानों के संघर्ष और उनकी एकता की जीत है। वहीं विस चुनाव के नजदीक समय में हुई इस घोषणा से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। मुद्दा बना रहे विपक्षी दलों के लिए असहज स्थिति हो गई है। हालांकि उनका कहना है कि सरकार का फैसला चुनावी स्टंट है। उधर, सत्ताधारी दल फैसले को देश-प्रदेश हित में बताते हुए इसका लाभ उठाने की तैयारी में जुट गया है।
बोले माननीय
कृषि कानूनों से किसानों को कोई एतराज नहीं था। विपक्षी राजनीतिक दलों ने उन्हें गुमराह किया। सरकार ने जो निर्णय लिया, काफी सोच समझकर लिया गया होगा। -विपिन वर्मा डेविड, सदर विधायक
किसानों के हित की चिंता भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा अन्य किसी दल को नहीं है। किसान भी पूरी तरह से भाजपा के साथ हैं, जो निर्णय लिया गया, वह उचित है। -वीरेंद्र सिंह लोधी, मारहरा विधायक
कृषि कानून किसानों के हित में थे। वापस होने से नुकसान है। किसानों ने कभी कानूनों का विरोध नहीं किया, केवल राजनीतिकरण के तहत आंदोलन हुआ। -सत्यपाल सिंह राठौर, विधायक अलीगंज
तीनों कानून किसानों के लिए लाभकारी थे। उन्हें काफी फायदा मिलता। किसान इसे समझ भी रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने राजनीति के तहत किसानों को गुमराह किया। - संजीव दिवाकर, विधायक जलेसर
बोले पार्टी पदाधिकारी
सरकार और प्रधानमंत्री का निर्णय पूरे देश और प्रदेश के हित में है। पार्टी किसान चौपाल के माध्यम से लगातार किसानों से जनसंपर्क करती रहेगी। -संदीप जैन, जिलाध्यक्ष भाजपा
पांच राज्यों में चुनाव को देखते हुए और सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के मार्च में उमड़ रहे जनसैलाब को देखते हुए सरकार ने दबाव में यह निर्णय लिया है। -परवेज जुबैरी, जिलाध्यक्ष सपा
प्रधानमंत्री का निर्णय किसानों की जीत है। देश में किसान ही सरकार चलाएंगे। कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध के चलते यह फैसला लिया गया।- गंगा सहाय लोधी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
चुनावी लाभ के लिए ये फैसला लिया गया। किसानों की चिंता थी तो सरकार पहले ही निर्णय ले सकती थी। कई आंदोलनरत किसान शहीद हो गए।- बलवीर भास्कर, जिलाध्यक्ष बसपा
बोले किसान नेता
यह केवल घोषणा है। जब तक लिखित रूप में कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते, हम इंतजार करेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी भी दी जाए। - ओमप्रकाश, भाकियू (अराजनैतिक)
कृषि कानून रद्द करने के साथ ही सरकार एमएसपी गारंटी कानून सहित अन्य आवश्यक कदम उठाए। मंडी व व्यापारियों की लूट से बचाया जाए। - अखिल संघर्षी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अभाकियू
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कानूनों को वापस लेने की नहीं, कुछ संशोधन की जरूरत थी। ऐसे तो भीड़ जुटकर किसी भी कानून को चुनौती देते हुए वापसी की मांग करेगी। -पवन ठाकुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू (किसान)
मिठाई बांटकर मनाया कृषि कानून वापसी का जश्न
एटा। अखिल भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शुक्रवार को रेलवे पुल स्थित शहीद स्तंभ पर बैठक की और मिठाई बांटकर जश्न मनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल संघर्षी ने कहा कि यह किसानों के आंदोलन, त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम है। कानूनों को सही बताने वालों के मुंह पर यह तमाचा है। इस दौरान सुरेंद्र शास्त्री, अनिल कुमार सिंह, जुगेंद्र सिंह, राजीव सोलंकी, डीके राजपूत, राजपाल वर्मा, मुकेश कुमार, अनुराग यादव आदि मौजूद रहे। भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष रघुराज सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों ने शहीद पार्क में बैठक की। संवाद