एटा। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में डॉक्टर इलाज के नाम पर मरीज को बमुश्किल दो मिनट का ही समय दे पा रहे हैं। बस मरीज से बीमारी पूछी और दवाएं लिखकर पर्चा थमा रहे हैं। मरीज की न तो नब्ज देखते हैं और न ही आला लगाकर जांच करते हैं। मरीज जब बाहर आता है तो कहता है डॉक्टर ने पूरी बात सुनी ही नहीं, बस बीमारी को पूछा और दवा लिख दी।
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी की सेवाएं सोमवार से शनिवार तक रहती हैं। इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है इससे कॉलेज की ओपीडी में नए व पुराने मरीजों को जोड़ लें 2600 से 2700 तक पहुंच रहे हैं। सर्वाधिक भीड़ मेडिसिन विभाग में हो रही है। यहां प्रतिदिन 650 से 750 तक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। दो कक्षों में चिकित्सक मरीजों को देखते हैं। मरीजों की भीड़ का दबाव अधिक होने के चलते चिकित्सक ने मरीज से बीमारी पूछी और पर्चा पर दवा लिखना शुरू कर देते हैं।
शुक्रवार को मेडिसिन विभाग में 660 मरीजों का उपचार किया गया। चिकित्सकों के पास मरीजों की भीड़ अधिक थी। स्वास्थ्यकर्मी ने नाम बोला मरीज अंदर गया और पर्चा हाथ में लेकर बाहर आ गया। गांव पवांस निवासी रश्मी ने बताया पूरी बात भी नहीं बता पाई कि दवा लिख दी। दोबारा आने पर चेकअप कराने की बात कही। बिजौरी निवासी रामसनेही ने बताया बुखार आ रहा है दर्द होता है।
डॉक्टर को बुखार का बोल पाए कि दवा लिखकर दे दी। जांच को बोला तो सुना ही नहीं। आला से चेक भी नहीं किया। शुक्रवार को गांव नगला बंजारा निवासी 65 वर्षीय पुष्पा को मलेरिया पॉजिटिव आया। बताया कि 4 दिन से उन्हें बुखार आ रहा था। उनको मेडिसिन वार्ड में भर्ती किया गया।