एटा। इस सदी में हुए चार विस चुनाव में औसत रूप से करीब 57 फीसदी मतदान हुआ है। इनमें सर्वाधिक 64 फीसदी मतदान 2017 के चुनाव में हुआ था। इस बार मतदाताओं के पास मौका है कि 65 फीसदी से पार मतदान कर सदी के नायक के रूप में अपना नाम चुनाव इतिहास में दर्ज कराएं। अधिकारी पूरी ताकत लगा रहे हैं कि मतदान प्रतिशत 70 प्रतिशत का आंकड़ा छुए।
इस बार करीब 12.81 लाख मतदाताओं को लोकतंत्र के महायज्ञ में हिस्सा लेना है। इसमें दी गई मतदान रूपी हर एक आहुति लोकतंत्र की शक्ति को बढ़ती जाएगी, जो प्रदेश और अपने जिले व विधानसभा क्षेत्र के पांच साल का भविष्य तय करेगी। यह मौका चूकते हैं तो फिर पांच साल के लिए पछताना पड़ सकता है। इस तरह की लापरवाही इस सदी के 2007 में हुए विस चुनाव में मतदाताओं ने की थी। तब केवल 46.38 फीसदी मतदाता ही वोट डालने के लिए पहुंचे थे। जबकि इससे पहले 2002 में 57.53 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। 2012 में स्थिति सुधरी और 61.62 प्रतिशत लोग मतदान करने के लिए बूथों पर पहुंचे। 2017 में जागरूकता और बढ़ी तथा मतदान में करीब तीन फीसदी का इजाफा हुआ। आंकड़ा 64.71 प्रतिशत पहुंच गया था। जरूरत इससे आगे बढ़ने की है। लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए इस तरह की उम्मीद भी की जा रही है।
सकीट में कम और अलीगंज में ज्यादा रहा मतदान
इन चार चुनावों के दौरान सकीट विस क्षेत्र में सबसे कम 43.16 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह विधानसभा 2012 में एटा सदर विस में विलय की जा चुकी है। सबसे अधिक मतदान करने का रिकॉर्ड अलीगंज के मतदाताओं के नाम है। जिन्होंने 2012 में 66.66 प्रतिशत वोट डाले।