नियुक्ति की मंजूरी और वेतन के लिए याची पहुंची थी कोर्ट, शुरू हो गई जांच
याची ने नियुक्ति को मंजूरी देने और वेतन जारी करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दावा किया कि उसका चयन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ था। कार्यभार ग्रहण करने के बाद नियमित रूप से काम कर रही थी। 11 फरवरी 2021 को संतकबीरनगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उसे निलंबित कर दिया। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि उसने गोरखपुर में कार्यरत दूसरी शिक्षिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षिक दस्तावेज का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की थी।
सत्यापन के लिए 12 और 13 अक्तूबर को बुलाने के बावजूद याची एसटीएफ के सामने पेश नहीं हुई। सुनवाई के दौरान भी उसकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने पाया कि जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही शैक्षिक दस्तावेज के आधार पर 10 या उससे अधिक लोगों ने नौकरी हासिल की है।
फर्जी डिग्री से गुरु जी बने लोग नौनिहालों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते : कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों पर लगाम लगनी चाहिए। फर्जी डिग्री से गुरु जी बने लोग नौनिहालों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। भले ही सरकार मुफ्त किताबें, कपड़े, एमडीएम जैसी सुविधाओं पर कितना ही खर्च कर डाले। शिक्षकों की अयोग्यता सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में कमी और शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होने का बड़ा कारण है। शिक्षक में विषय का ज्ञान होने के साथ बच्चों को पढ़ाने की क्षमता, नियमित उपस्थिति, धैर्य और सभी विद्यार्थियों के प्रति समान व्यवहार भी जरूरी है।