निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण के तहत निशुल्क शिक्षा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को राजधानी में एक भी पात्र छात्र नहीं मिला है।
सत्र शुरू हुए एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन जिम्मेदारों के पास अब तक लाभान्वित होने वाले छात्रों की कोई सूची नहीं है।
दूसरी ओर राजधानी के प्रतिष्ठित महंगे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक फीस माफ कराने और बच्चों का दाखिला क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में कराने के लिए लगातार आवेदन कर रहे हैं।
फ्री एजुकेशन की है व्यवस्था
प्रदेश सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के प्रावधानों के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा देने की घोषणा की है। इसके तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
नहीं आया एक भी आवेदन
अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों को कक्षा एक में 25 प्रतिशत तक प्रवेश देकर निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था है। योजना का लाभ पाने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा लेकिन अभी तक वहां एक भी पात्र छात्र का आवेदन नहीं आया है।
जटिल प्रक्रिया से मुश्किलें
योजना के लिए एक भी आवेदन सामने न आने के पीछे जटिल प्रक्रिया को जिम्मेदार माना जा रहा है।
राजधानी के प्राइमरी स्कूलों पर काम कर रहे समाजसेवी संदीप खरे के मुताबिक आमतौर पर इस योजना के दायरे में रिक्शा चलाने वाले, मजदूरी करने वाले और इस तरह के दूसरे गरीब तबकों के बच्चों को पढ़ाया जाना है।
प्रचार-प्रसार की कमी
समाजसेवी फर्रुखरहमान खान कहते हैं कि वास्तव में जिन्हें लाभ देना है, उनका पता नहीं है। ‘स्कूल चलो’ अभियान जैसा ही जनजागरण अभियान चलाकर पात्र लोगों तक इसका लाभ पहुंचाया जा सकता है।