पिछले कई दिनों से परिवार के साथ ही पूरे बहरियाबाद कसबे के लोगों की निगाहें पाकिस्तान की जेल से छूटकर आने वाले दिनेश विश्वकर्मा की राह तक रही थीं। बुधवार की दोपहर वह जैसे ही कसबे में पहुंचा, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। हर किसी ने दिनेश पर पुष्प बरसाए और उसे हाथों-हाथ लिया।
दिनेश तीन साल पहले राजस्थान में रहने के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गया था, जिस पर उसे पाक सैनिकों ने पकड़कर जेल में डाल दिया था।
पाकिस्तान के कराची के मलीर जेल से तीन वर्षों बाद रिहा होने पर दिनेश विश्वकर्मा दिल्ली से सुबह साढ़े वाराणसी पहुंचा।
मां-बेटे को रोते देख लोगों की आंखों में आंसू
यहां से निजी वाहन से आधा दर्जन वाहनों के काफिले के साथ दोपहर में उदंती नदी के तट पर स्थित शिव मंदिर पहुंचा। यहां पूजा करने के बाद वह खुली जीप में जुलूस की शक्ल में निकला।
दिनेश का काफिला जिधर से गुजर रहा था, लोग उस पर फूलों का वर्षा कर रहे थे। वह लगभग एक बजे अपने घर पहुंचा। जीप से जैसे ही दिनेश नीचे उतरा मां कौशल्या देवी ने उसे सीने से लगा लिया। इस बीच मां-बेटे की आंखों से आंसुओं की धार निकल पड़ी।
यह दृश्य देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी डबडबा गई। पांचों बहनें भाई से लिपट गई। पत्नी रुक्मिणी देवी ने आंखों में खुशी के आंसू लिए पति के पैर छुए और आरती उतारी।
तीन साल बिना सब्जी खाए रहा दिनेश
इसके पहले, सुबह शिवगंगा एक्सप्रेस से कैंट स्टेशन पहुंचने पर उत्तर प्रदेश प्रदेश विश्वकर्मा महासभा के पदाधिकारी अशोक विश्वकर्मा के नेतृत्व में बैंड बाजे के साथ दिनेश को फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया।
इस मौके पर आदर्श भारतीय संघ के संजय चौबे, काशी विद्यापीठ के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वनाथ कुंवर, निषाद राज सेवा समिति के विनोद कुमार निषाद, जिला धोबी घाट बचाओ संघर्ष समिति के रमेश चौधरी समेत तमाम लोग मौजूद थे।
दिनेश ने बताया कि वह साढ़े तीन साल तक बिना सब्जी खाए रहा। क्योंकि पाक जेल में केवल पानी की तरह दाल और रोटी ही मिलती थी। उसने कहा कि इन दिनों में वह रोज अपने घर और परिवार को याद करता रहा।