उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में दलित बालिका की दरिंदगी के साथ हत्या और उसके बाद पुलिस का प्रदर्शनकारियों पर कहर।
बालिका की हत्या से ज्यादा इस बात पर ‘फोकस’ था कि आक्रोशित महिलाओं, बच्चों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बर्बरता से लाठीचार्ज और फायरिंग की।
अलीगढ़ रेंज के डीआईजी प्रकाश डी ने माना कि मैंने जांच की और पाया कि प्रदर्शनकारी, महिलाओं और बच्चों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वह संदेश देना चाहते हैं कि पुलिस जनता के साथ है उनसे अलग नहीं है। उनकी मददगार है।
उनकी कोशिश जनता और पुलिस के बीच की खाई पाटने की है। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया था फायरिंग नहीं की गई थी।
पुलिस की ओर से रबर बुलेट, आंसू गैस के साथ फायरिंग की थी जिसका मकसद जन संपत्ति का नुकसान होने से बचाना था।
पुलिस ने जरूरत से ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। इसमें पीड़ित परिवार के भी कुछ लोग घायल हुए हैं। बालिका से रेप की बात पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
बालिका की हत्या के खुलासे को एसएसआई बन्ना देवी और कांइम ब्रांच के नेतृत्व में दो टीमें गठित की गई हैं।
- प्रकाश डी, डीआईजी
लगातार सामने आ रहा खाकी का चेहरा
-बिजनौर के अफजलगढ़ थाने में दुष्कर्म पीड़िता को पीटा गया।
-बुलंदशहर में दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग की शिकायत पर कार्रवाई के बजाय उसे ही हवालात में डाल दिया गया।
-मथुरा में पुलिस की वसूली के चक्कर में एक की जान गई।
-शामली के एक थाने में बर्थडे पार्टी में थानेदार बोतल सिर पर रख कर नाचे।
-गोंडा के एएसपी केसी गोस्वामी ने दुष्कर्म पीड़िता के लिए अशोभनीय टिप्पणी की थी। बाद में उन्हें जिले से हटा गया।
-इलाहाबाद में पकड़े गए गोवंश तस्करी में 19 पुलिसकर्मी जुड़े पाए गए हैं।