संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मिलावट के धंधेबाजों ने हर सामग्री में लागत से ज्यादा मुनाफा कमाने का तरीका खोज लिया है। मसालों के साथ ही मूंगफली के दाने, काली मिर्च, जीरा, सूजी में हानिकारक चीजों की मिलावट कर दो से तिगुना लाभ कमा रहे हैं।
इससे वह लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। इधर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इनके खिलाफ अभियान चला रखा है। इसके बावजूद मुनाफाखोर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
सहालग को देखते हुए मिलावटखोर अधिक सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में सेहत के प्रति खुद ही जागरूक न हुए तो मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लिवर में सूजन, पाइल्स, अल्सर जैसी बीमारियां चपेट में ले सकती हैं।
आठ माह पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जो नमूने जांच के लिए भेजे थे, उनमें मूंगफली के दाने के अलावा किशमिश, इलायची का दाना, रामदाना, साबूदान के नमूने फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में मूंगफली में नमी पाई गई है।
इसमें न्यूट्रिएंट्स की मात्रा कम थी। लैब की जांच में रामदाना अधोमानक पाया गया। जांच रिपोर्ट में किशमिश सुरक्षित पाई गई। इसमें नमी थी। साथ ही न्यूट्रिएंट्स मानक के अनुरूप नहीं था।
इलायची दाना भी अधोमानक और असुरक्षित पाया गया था। इस मामले में संबंधित पर विभाग ने कार्रवाई की है। इसके बावजूद धंधेबाज लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इधर बाजार में धंधेबाजों ने मूंगफली तीन तरह की उतारी है।
थोड़ा काला कलर लिए हुए 100 रुपये किलो, उससे साफ 120 रुपये तो सफेद रंग में 140 से 150 रुपये किलो तक बिक रही है। सहालग में देसी घी की बिक्री खूब हो रही है।
अनाम कंपनी की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देसी घी बाजार में उपलब्ध है। इनमें खुशबू न के बराबर है। खास बात यह है कि भीषण गर्मी के बावजूद यह घी जमा ही रह रहा है। जबकि शुद्ध देसी घी गर्मी में पिघल जाता है।
सूजी में भी मिलावटखोर आरारोट और पिसा चावल मिलाकर किराने की दुकानों पर जुटे ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। लाल मिर्च में हानिकारक रंग मिलाया जा रहा है। इसके अलावा दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिला देने से उसे असली जीरे से छांटना मुश्किल होता है।