एचपी और बीपीसीएल के कई पेट्रोल पंप ड्राई
देवरिया। जिले में डीजल-पेट्रोल का संकट गहराने लगा है। डिपो से तेल की आपूर्ति नहीं होने से जनपद के तमाम पेट्रोल पंप ड्राई चल रहे हैं। खासकर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और बीपीसीएल में आपूर्ति सीमित कर दी गई है। इन कंपनियों के डीलर इंडेंट लगाकर छह दिन से टैंकर आने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में कुल 115 पेट्रोल पंप हैं। इसमें एचपी और बीपीसीएल के कई पंप ड्राई हैं, तो अधिकांश पंपों पर नाम मात्र का डीजल और पेट्रोल बचा है। इन कंपनियों के डीलर तेल लेनेे के लिए बैतालपुर डिपो का चक्कर काट रहे हैं। डीलरों का कहना है कि छह दिन से इंडेंट लगाने के बाद भी तेल नहीं मिल रहा है। कंपनी ने तेल की आपूर्ति को सीमित कर दिया है। एक दिन में सिर्फ 50 से 52 गाड़ियों को लोड किया जा रहा है। तेल के इस खेेल में रेेट का अंतर बताया जा रहा है। कच्चे तेल का दाम बढ़ने से कंपनी को तेल बेचने में भारी घाटा लग रहा है। इस कारण कंपनी ने डीलर को तेल की आपूर्ति सीमित कर दी है। तेल की आपूर्ति का यही हाल रहा तो डीजल और पेट्रोल के लिए हाहाकार मचना तय है। तेल उपभोक्ता रामकुमार सिंह ने कहा कि डीजल की किल्लत से आम जनता को परेशानी हो रही है। क्षेत्र के कई पेट्रोल पंप से डीजल नदारद है। विकास राव ने कहा कि सरकार को तेल की आपूर्ति पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी के घाटे को कम करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। श्रीनाथ तिवारी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी श्रीलंका जैसी हालात हो जाए। राजस्थान, मध्यप्रदेश के बाद अब यूपी में भी डीजल पेट्रोल का संकट गहरा रहा है। संतोष वर्मा ने कहा कि नगर में पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलने से दूर जाना पड़ रहा है। डीजल पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर प्रशासन पहल करें।
एचपीसीएल कंपनी के सेल्स अफसर मोहन महतो ने कहा कि तेल की कोई किल्लत नहीं है। टैंकर कम होने से पेट्रोलियम पदार्थों की पंप तक आपूर्ति में देरी हो रही है। कंपनी ने टैंकर के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
पेट्रोलियम एसोसिएशन के महामंत्री अखिलेंद्र शाही ने कहा कि कंपनियों को तेल की आपूर्ति पर ध्यान देना चाहिए। सरकार और कंपनी के बीच रेट का मसला चल रहा है, लेकिन आवश्यक वस्तु की आपूर्ति के मामले में कंपनी को कुछ घाटा सहकर भी जनता की जरूरतों को पूरा करना होगा। रेट गिरने से पंप मालिकों का भी बहुत घाटा हुआ है।