कोरोना संक्रमण के चलते नहीं निकला मोहर्रम का जुलूस
देवरिया। कोरोना संक्रमण के चलते जिले में इस बार ताजिया जुलूस नहीं निकला। हालांकि मुस्लिम मोहल्लों में पर्व के चलते चहल-पहल रही। मोहल्लों में हरे व लाल रंग के झंडे इस्तकबाल करते रहे। सांकेतिक तौर पर ही कुछ मोहल्लों में युवाओं ने ढोल-तांसा अवश्य बजाया, हालांकि अधिकांश लोगों ने घरों में ही ताजिया रखकर पर्व मनाया। किसी अखाड़े की ओर से मोहर्रम का जुलूस न निकलने पाए, प्रशासन के अधिकारी इस पर पूरे दिन नजर गड़ाए रहे।
शहर के अबूबकरनगर, अलीनगर, शहीदनगर, बांस देवरिया, न्यू कालोनी, खरजरवा, रामनाथ देवरिया सहित अन्य मुस्लिम मोहल्लों में मुहर्रम पर्व र्की ौनक तो रही, लेकिन ताजिया किसी चौक पर नहीं रखी गई। किसी अखाड़े ने न तो जुलूस निकाला और न ही कोई खेल या करतब हुए। शहर के सबसे सबसे पुराने स्टार क्लब अब्बासी अखाड़ा के सदर सेराज अहमद सिद्दीकी ने बताया कि कोरोना के चलते एवं जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार, ताजिया जुलूस नहीं निकाला गया। उधर अंजुमन इस्लामिया के पूर्व सदर शकील अहमद सिद्दीकी ने कहा कि सरकारी चौक पर ही बुधवार की रात में कुछ छोटी ताजियां रख फातिहा पढ़ा गया। महिलाओं ने घर से बनाकर प्रसाद सामग्री इस पर चढ़ाया और मन्नत मांगी। पुलिस के जुटने पर धीरे-धीरे सभी अपने घर को रवाना हो गए। कहीं से इस बार किसी अखाड़े की ओर से ताजिया का जुलूस नहीं निकाला गया।
मोहम्मद साहब के नवासे की शहादत की याद दिलाता है मोहर्रम
देवरिया। मोहर्रम पर शुक्रवार को अल अंजुमन केयर फाउंडेशन की ओर से रेलवे स्टेशन रोड स्थित कार्यालय पर गोष्ठी हुई। इमाम हुसैन की शहादत पर मानवता का संदेश विषय गोष्ठी में चेयरमैन मो.सुहेल अंसारी ने कहा कि इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत का पहला महीना है। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों को कर्बला के रेगिस्तान में जंग के दौरान शहीद हो गए थे। उनके ही याद में मुहर्रम मनाया जाता है। इस दौरान मौलाना जैनुल हक, शमशाद अहमद, सदरुल हक सिद्दीकी, वारिस अली, जावेद अंसारी, जुनैद हुसैन, अशरफ अहमद, इमरान राइनी, असगर गनी, वसिउल्लाह खान, अफसारुल हक, आशिक अली अंसारी, रेयाज अंसारी, मुन्ना, शेर अली, अकरम अली, अतीक अंसारी, जोया अंबर, इमरान खान, शेरू आदि मौजूद रहे।
इंसानियत की हिफाजत के लिए इमाम हुसैन ने कटाया था सिर
भाटपाररानी। क्षेत्र के भोपतपुरा गांव में नमाजे जुमा के दौरान मोहर्रम की अहमियत पर तकरीर करते हुए मौलाना महमूद आलम कादरी ने कहा कि कर्बला के मैदान में पैगंबर मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत की हिफाजत के लिए अपना सर कटा दिया था। दसवीं मुहर्रम को भी जुमा का दिन था और आज मुहर्रम के दिन भी जुमा है। इराक के शहर कर्बला के मैदान में बादशाह यजीद व हुसैनी खानदान के बीच यह लड़ाई आज से 1382 वर्ष पहले 61वीं हिजरी में हुई थी। बादशाह यजीद ने इमाम हुसैन के पास अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए पैगाम भेजा। लेकिन इमाम हुसैन ने उस जालिम व अन्यायी राजा की अधीनता स्वीकार करने व उसे अपना गुरु मानने से साफ इंकार कर दिया। इस पर बादशाह यजीद ने जंग का ऐलान कर दिया। एक तरफ 22 हजार की संख्या वाली यजीदी फौज हथियारों से लैस थी, जबकि महज 72 की संख्या में हुसैनी खानदान के लोग खाली हाथ थे। बादशाह यजीद ने हुसैनियों का पानी भी बंद करा दिया। इमाम हुसैन सहित उनके खानदान के 72 लोगों ने जालिम बादशाह के सामने सिर झुकाने के बजाय अपना सिर कटा कर यह बता दिया कि हमें अन्याय व अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए हर हाल में इंसानियत की हिफाजत करनी चाहिए। इस दौरान हाफिज रहमतुल्लाह, हाजी ईद मुहम्मद, सफीउल्लाह अंसारी, मकसूद अहमद भोपतपुरी, मुहम्मद इस्लाम, मुन्ना सेठ, मुर्तुजा हुसैन, फरीदन, मुस्तकीम आदि मौजूद रहे।
फिजा में गूंजा उठा या हुसैन का नारा
रुद्रपुर। मोहर्रम की नवीं की शाम को नगर सहित क्षेत्र के चौक पर ताजिया रखा गया। ताजियादारों ने शहादत और गम का त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया। इस दौरान या हुसैन या हुसैन के नारे बुलंद किए गए। लोगों ने शासन की गाइडलाइन के मुताबिक मोहर्रम का पर्व मनाया।
बृहस्पतिवार की शाम नमाज अदा करने के बाद पुराना चौक पर ताजिया रखा गया। नगर के विभिन्न मोहल्लों में चौक पर ताजिया रख लोगों ने हुसैन की याद में फातिहा पढ़ी। शुक्रवार की दोपहर जुमे की नमाज के बाद लोग चौक पर जुटे। त्योहार को देखते हुए जगह-जगह पुलिस तैनात रही। लोगों ने ताजिया के समीप रखी गई कर्बला की मिट्टी को देर शाम सांकेतिक रूप से कर्बला में दफन किया। एसडीम संजीव कुमार उपाध्याय और सीओ अंबिका प्रसाद मयफोर्स भ्रमण करते रहे। क्षेत्र के निबही, गाजीपुर भैंसही, ईश्वरपुरा, छपौली, बरडीहा दल, मदनपुर आदि क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल में मोहर्रम का त्योहार मनाया गया।
कर्बला में नहीं दफन हुआ ताजिया
भाटपाररानी। मोहर्रम के दिन शुक्रवार को इस वर्ष भी नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में कहीं भी कर्बला में ताजिया नहीं दफन हुआ। शासन के निर्देश पर ताजिया दारों ने चौक पर ही ताजिया रखा। बाद में ताजियादारों ने कर्बला में मिट्टी ले जाकर फातिहा पढ़ी और देश के लिए दुआ मांगी। कहीं भी कर्बला में न तो ताजिया गई और न ही मेला लगा। जगह-जगह स्थानीय पुलिस मुस्तैद रही।
लार में चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस
सलेमपुर/लार। कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए ताजियादारों ने जुलूस नहीं निकाला। चौकी पर ही लोगों ने फातिहा कर मुल्क की सलामती की दुआ मांगी। छिटफुट घटनाओं को छोड़ पर्व शांति पूर्वक संपन्न हो गया। सुरक्षा के लिहाजा से चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।
लार थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक सौ दो चौकी है। प्रत्येक वर्ष मोहर्रम में ताजिया रखी जाती हैं। इस बार कोविड 19 की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा निर्देश देते हुए ताजिया जुलूस पर रोक लगा दी थी। शासन के निर्देशों का पालन करते हुए लोगों ने जुलूस नहीं निकला। पहले दिन की बड़ी चौकी पर ही लोगों ने कोविड 19 के नियम का पालन करते हुए नगर सहित अलग अलग गांवों में फात्या कर मुल्क की सलामती की दुआ मांगी। शुक्रवार की सुबह अलग अलग गांवों के ताजियादार थाना स्थित कर्बला पर पहुंचे। यहां की मिट्टी लेकर चौक पर रखी ताजिये का मिलान कराया। इस दौरान नगर सहित थाना क्षेत्र के अलग अलग गावों में पुलिस बल तैनात रही। शाम करीब चार बजे अति संवेदनशील माने जाने वाले लार पहुंचे एडीएम प्रशासन कुंवर पंकज, एएसपी राजेश सोनकर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजन द्विवेदी, सीओ कपिल मुनी सिंह, प्रभारी निरीक्षक प्रदीप शर्मा ने नगर भ्रमण कर शांति व्यवस्था का हाल जाना। वहीं एहतियात के तौर पर डेढ़ सेक्सन पीएसी तैनात रही। भारी मात्रा में पुलिस बल को देख लोग सहमे रहे। सीओ कपिल मुनि सिंह ने बताया कि शांति पूर्वक त्यौहार संपन्न कराया गया है। सलेमपुर के भठवांधरमपुर, जमुआ, कस्बा सलेमपुर, नवलपुर, मझौलीराज, बालेपुर, चेेेरो, डोलछपरा, भागलपुर, मईल, तेलिया कला, पनिका, अंडिला, बगहीं, भटौली, पिपरा बांध, कुंडौली, पड़री बाजार आदि जगहों पर घर पर ही ताजिया रख लोगों ने फातिहा कर मुल्क की सलामती की दुआ मांगी।
खामोशी के साथ कर्बला में दफनाया सेहरा
बरहज। नगर क्षेत्र में मोहर्रम का त्योहार सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। बिना किसी जुलूस के कोविड नियमों का पालन करते हुए ताजियादारों ने गम के माहौल में खामोशी के साथ कर्बला में सेहरा दफनाया। जबकि साथ में मिट्टी ले आए। एहतियात को लेकर प्रशासन तैनात रहा।
शनिवार को मोहर्रम त्योहार के दिन सुबह से ही लोग तैयारी में जुटे हुए थे। कोरोना संकट के कारण ताजियादारों ने अपने-अपने घरों के सामने चौक पर ताजिया रखकर फातिहा पढ़ा। शाम को ताजियादारों ने कर्बला में सेहरा दफनाया। जबकि शाम को नमाज के बाद रोजा खोला। पर्व पर बिना जुलूस, अखड़े और ढ़ोल-ताशों के बीच लोगों ने हसन-हुसैन को याद किया। वैश्विक महामारी के कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। क्षेत्र के कपरवार, बारा दीक्षित, करायल, करुअना, सोनाड़ी, भलुअनी, पैना, मगहरा, मदनपुर आदि जगहों पर भी ताजियादारों ने सेहरा दफनाया। सौहार्दपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न कराने और कोविड नियमों का पालन कराने के लिए एसडीएम संजीव कुमार यादव, सीओ देवआनंद, तहसीलदार सतीश कुमार, इंस्पेक्टर टीजे सिंह जमे हुए थे। इस दौरान अब्दुल खालिक, इमामुद्दीन खान, शब्बीर शाह, खुर्शीद आलम, औरंगजेब शाह, नाजिम अली, खेदारु अंसारी, शराफत अली, सज्जाद हुसैन, शरीफ मंसूरी, अब्बास हाशमी, मोहम्मद आलम आदि ने करबला जाकर सेहरा दफनाया।