संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। तीन महिलाओं समेत चार लोग गांव छोड़ दूसरे प्रांतों में जाकर शरण लिए हैं। आरोप है कि एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंटों की प्रताड़ना से तंग आरक इन लोगों ने घर छोड़ दिया है।
इसके अलावा कई अन्य और महिलाएं एजेंटों के रोजाना घर पहुंचने और धमकियों से परेशान होकर गांव में ही इधर-उधर भागी फिर रहीं है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि एजेंट पुलिस बुलाने और कोर्ट में घसीटने की धमकी देते हैं। घर में घुसकर रसोई गैस सिलिंडर सहित अन्य सामान भी उठा ले जाते हैं। खुखुंदू गांव की जीरा देवी ने बताया कि समय से किस्त जमा किया जाता है। कभी-कभार परेशानी आने पर जब किस्त देने में देरी होती है तो एजेंट तरह-तरह की यातनाएं देने लगते हैं। इससे परेशान होकर गांव की चंदा देवी पत्नी बृजेश ने घर-बार छोड़ दिया।
उसने 16 अलग-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज ले रखा है। कुछ दिनों तक चंदा ने सभी समूहों का किस्त भरा है।
जब किस्त नहीं दे पाई तो एजेंट बारी-बारी से घर पहुंच कर उसे प्रताड़ित करने लगे। करीब दो साल पहले वह परेशान होकर गांव छोड़कर गुजरात चली गई। वहीं मजदूरी कर रही है।
अनिता देवी भी दो साल पहले एजेंटों की प्रताड़ना से परेशान होकर घर छोड़कर भाग गई।
जबकि गांव की सारा देवी समूह का कर्ज चुकता करने के लिए एजेंटों के दबाव से दिल्ली में जाकर मेहनत-मजदूरी कर रही है। सूरज गोड़ भी गांव छोड़कर सूरत चला गया। गांव की मंजू देवी, गोशाला में कार्यरत इंदू देवी और सुनीता देवी ने भी समूह से कर्ज ले रखा है।
समय के किस्त नहीं दे पाने पर एजेंट रोजाना इनके पास पहुंचकर अपशब्दों से इन्हें नवाजते हैं। नूरजहां ने तीन लाख रुपये का कर्ज लिया है।
त्योहार के नाते किस्त देने में देरी होने पर एजेंट दबाव बना रहे हैं। समूह की अन्य महिलाओं का कहना है कि एजेंट किस्त लेने के लिए किसी भी हद तक उतर जा रहे है।