ग्रामीण दहशत में जरूरत के सामान खरीदने के लिए भी गांव से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गांव के दोनों सरकारी स्कूलों पर बुधवार को भी बच्चे पढ़ने नहीं पहुंचे। पुलिस की पहरेदारी और कार्रवाई को देख अभिभावक अपने पाल्यों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
दोपहर 12 बजे गांव के चौराहे के एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इतना डर लग रहा है कि कुछ बोलना ही ठीक नहीं है। अभी भी मारकाट की आवाजें कानों में गूंज रही हैं। बुधवार की दोपहर करीब 12 बजे दुकान पर आए एक बाइक सवार ने पूछा कि फतेहपुर का लेहड़ा टोला किधर है? दुकानदार कुछ देर चुप रहा और इशारे में रास्ता बता दिया। धान के खेत में घास निकाल रही एक महिला ने कहा- बाबू, जमीन यहीं रह जाएगी और सभी को ऊपर चले जाना है। संतोष तो करना पड़ेगा।
चारा काटकर जा रहे इसी गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि जो लोग फरार हैं, उसमें से तीन के चार जानवर उनके दरवाजे पर बंधे हैं। अब उनके लिए भी चारे की व्यवस्था करनी पड़ रही है। पगडंडी पर साइकिल से आ रहे एक किशोर ने बताया-पापा घर पर नहीं हैं। रुपये नहीं हैं। चौराहे पर गेहूं देकर सरसों का तेल लेने जा रहा हूं। एक वृद्ध ने बताया-दांत में दर्द हो रहा है। चौराहे पर जा रहा हूं। डर लग रहा है कि पुलिस कहीं पकड़ न लें।
फतेहपुर गांव में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल
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