मामले की जांच में पता चला कि पुलिस और राजस्वकर्मियों से सांठगांठ कर प्रेम और उसके साथियों ने सरकारी जमीनों पर कब्जे को रोकने के लिए बनाए गए एंटी भू-माफिया सेल की धज्जियां उड़ा दीं। लंबे समय से ग्रामीण सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायत कर रहे थे, लेकिन पुलिस या राजस्वकर्मियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सामूहिक हत्याकांड के बाद पूरे मामले की गहनता से जांच हुई तो फतेहपुर गांव के अभयपुर टोले में सरकारी जमीनों पर कब्जे की स्थिति देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। घटना के बाद इलाके के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
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सत्यप्रकाश दूबे समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या में 27 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। इनमें से मुख्य आरोपी पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव का तीन मंजिला मकान खलिहान, सरकारी स्कूल और वन विभाग के जमीन में बना है।
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वहीं, अन्य आरोपी रामजी यादव, रामभवन यादव, गोरख यादव, परमहंस यादव, देवानंद यादव, श्याम यादव, जयनरायण यादव, अभिषेक यादव का भी ग्राम सभा के खलिहान और सरकारी भूमि पर कब्जा है। तहसीलदार केशव प्रसाद ने कहा कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।