विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर आंदोलन को फिर से उभार देने की कोशिश में जुट गई है। संत-धर्माचार्यों के नेतृत्व में कुंभ मेले में आंदोलन को नए स्वरूप में खड़ा करने की तैयारी है। फरवरी में आयोजित केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक और उसके बाद आयोजित संत सम्मेलन में भावी रणनीति की घोषणा की जाएगी। वहां मंदिर निर्माण तिथि की घोषणा भी हो सकती है।
अयोध्या विवाद का हाईकोर्ट से फैसला आने और मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद लंबे समय से सुसुप्त पड़े राम मंदिर आंदोलन को विहिप ने तेज करने की कई बार कोशिश की लेकिन उसे वह सफलता नहीं मिली। विहिप व संत-धर्माचार्य अयोध्या विवाद का हल संसद में कानून बनाकर करने के पक्ष में हैं। इस मुद्दे पर विहिप ने संत-धर्माचार्यों के नेतृत्व में लोकसभा के सभी दलों के सांसदों का घेराव व राम मंदिर के लिए कानून बनाने के लिए पत्र सौंपने का राष्ट्रव्यापी अभियान भी छेड़ा लेकिन अभियान को अपेक्षित सफलता न मिल सकी।
भावी आंदोलनों की रणनीति
अब वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विहिप एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन को नए स्वरूप में उभार देने में जुट गई है। न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने 26 नवंबर को अयोध्या में हिंदू संसद की आवाज उठाई थी। विहिप पहले ही कह चुकी है कि वह इलाहाबाद (प्रयाग) महाकुंभ में राम मंदिर आंदोलन की भावी आंदोलनों की रणनीति को अंतिम रूप देगी। मगर अब जो संकेत मिल रहे हैं उसके मुताबिक धर्म संसद और संत समाज की सहमति मिलने पर राम मंदिर निर्माण शुरू करने की तिथि भी घोषित की जा सकती है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं न्यास अध्यक्ष के संकेत को ध्यान में रखकर तैयारी की जा रही है जिसमें तिथि तक की घोषणा की बात शामिल है। लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक व संत-सम्मेलन में ही होगा। विहिप से जुड़े शीर्ष धर्माचार्यों के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक कुंभ मेले में छह फरवरी को आयोजित है। बैठक में मंदिर आंदोलन से जुड़े शीर्ष धर्माचार्य राम मंदिर आंदोलन, आतंकवाद, गोरक्षा, गंगारक्षा, धर्मांतरण आदि विषयों पर आगामी कार्यक्रमों व आंदोलनों की रूपरेखा तय करेंगे। सात फरवरी को कुंभ मेले में ही आयोजित संत सम्मेलन में इन पर विस्तार से चर्चा कर कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी।