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लखनऊ मेल के लुटेरे निकले करोड़पति, पुलिस रह गई दंग

Sat, 03 May 2014 08:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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लखनऊ मेल में डकैती डालने वाले लुटेरे करोड़ों की संपत्ति के मालिक है। ट्रेन में चोरी, लूट और डकैती ही इनका मुख्य व्यवसाय है। इसके साथ ही ये लोग प्रापर्टी डीलिंग आड़ के लिए करते हैं। इस काम से इन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाई है। सभी के पास कई मंजिलें मकानों के साथ कई कई प्लाट भी हैं।
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जीआरपी के हत्थे चढ़े बदमाश लोकेश भी गैंग का सदस्य है। माल बरामद करने के लिए जीआरपी की टीम इन्हें इनके घर पर भी लेकर गईं। वहां देखकर सभी की आंखें फटी की फटी रह गईं। अजय कालिया और कालूराम के लोनी में मकान हैं। इसके अलावा कई प्लाट भी हैं। जिनकी कीमत कई करोड़ रुपये है। ये गैंग ट्रेनों में हमेशा रात को दो बजे के बाद ही घटनाओं का अंजाम देते थे। इनके हाव भाव और पहनावे से संभ्रांत यात्री लगते थे। ये सभी डिजाइनर कपड़े पहनने के साथ ही हाथों की चारों अंगुलियों में अंगूठी और गले में चेन पहनकर चलते थे।

सीओ जीआरपी मुरादाबाद राजन त्यागी ने बताया कि ये गैंग पिछले दस सालों में रूट बदल बदलकर घटनाओं को अंजाम देते हैं। आगरा मुंबई रूट पर एक विदेशी का बैग उड़ाया था। जिसमें लाखों डालर और डायमंड निकले थे। इसके बल पर इन्होंने प्रापर्टी खड़ी कर ली। इनके बच्चे भी अच्छे स्कूलों में शिक्षा हासिल कर रहे हैं। कालूराम का बेटा सीए कर रहा है।
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केवल चाकू के बल पर करते थे वारदात

ट्रेन में डकैती डालने वाले बदमाशों ने हमेशा चाकू के बल पर ही वारदातों को अंजाम दिया है। लखनऊ मेल में भी डकैती के दौरान यात्रियों के विरोध पर उन्होंने ट्रेन पर पथराव किया था।

जीआरपी के अनुसार इस गैंग का सदस्य बर्तो उर्फ राहुल चाकू लेकर सुरक्षा के लिए चलता था। बर्तो पद्मावत एक्सप्रेस में लूट करने करने वाले लोकेश का सगा भाई है। अगर इनके पास हथियार होते थे पथराव के साथ हवाई फायर जरूर करते।

राजू चिकना के पास रेलवे सुपरवाइजर का फर्जी पहचान पत्र और एसी फर्स्ट का पास भी मिला है। ये टीटीई और रेलवे के दूसरे स्टाफ पर रौब जमाने का काम करता था।

ऐसे आए पकड़ में

जीआरपी की चारों टीमों ने बदमाशों की पकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही थी। लेकिन कोई सिरा नहीं मिल रहा था। ट्रेन डकैती के दौरान घटना क्षेत्र की लोकेशन में 6,000 मोबाइल काम कर रहे थे। सर्विलांस के जरिए इन नंबरों की जांच शुरू की गई। जिनमें से छह नंबर संदिग्ध मिले।

इन नंबरों को सर्विलांस पर रखने पर पता चला कि एक नंबर जिसकी लोकेशन मुरादाबाद थी बाकी नंबरों पर बात कर रहा था। इसका पता निकाला गया जिसमें असलम अंसारी पुत्र मेहंदी हसन निवासी पीर का बाजार दिखाया गया था। जबकि उस पते पर वह रहता ही नहीं था।

सर्विलांस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैस कर जीआरपी लुटेरों को पकड़ने में सफल रही।
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एनसीपी का नेता है असलम

असलम अंसारी शातिर बदमाश रहा है। वह पहले अकेले ही ट्रेनों में चोरी चकारी किया करता था। इसी दौरान लोकेश गैंग के संपर्क में आया। गैंग में शामिल होने के बाद लूट की घटनाओं को अंजाम देने में लग गया। इसके साथ ही उसने राजनीति और प्रोपर्टी डीलिंग में अपनी पहचान बनाना शुरू कर दिया।

गैंग का सदस्य बनने के बाद ट्रेनों में घटनाओं को अंजाम देकर कमाई करने के बाद आड़ के लिए असलम ने प्रोपर्टी डीलर का काम शुरू कर दिया। इसके साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़ने के बाद उसने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष का पद भी हासिल कर लिया। दो साल पहले आउटर पर ट्रेन से कूदकर भागते हुए जीआरपी ने पकड़ा था। पूछताछ के लिए थाने लाया जाया गया। लेकिन कुछ हासिल नहीं होने पर उसे छोड़ दिया गया। वहां से छूटने के बाद उसने अपने राजनीतिक दलों के साथ  मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से कर डाली।

इस प्रकरण की जांच तत्कालीन सीओ चूड़ामणि को सौंपी गई। कई महीने जांच चली। इस दौरान असलम जीआरपी पर दबाव बनाने के लिए लगातार नए नए हथकंडे अपनाता रहा। इसका फायदा ये मिला कि स्टेशन पर अपने साथियों के साथ घूमने के बावजूद जीआरपी के जवान उससे दूर ही रहते।
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