हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए सेवा की अर्हता में छूट देने वाले 2013 के संशोधित नियमों को असंवैधानिक माना है।
फिलहाल कोर्ट ने इसके अमल पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने मामले में प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस जारी करने के साथ ही सरकार समेत पक्षकारों से चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोविंद चंद्र गुप्ता की याचिका पर दिया।
माना जा रहा इसे असंवैधानिक
याची ने यूपी गवर्नमेंट सर्वेंट्स रिलेक्सेशन इन क्वालीफाइंग सर्विस फॉर प्रमोशन (पहला संशोधन) रूल्स 2013 की वैधता को चुनौती देकर इसे शून्य व असंवैधानिक घोषित किए जाने का आग्रह किया है।
राज्य सरकार ने इन नियमों की अधिसूचना 24 अप्रैल 2013 को जारी की थी।
इनमें नियम 4 के तहत राज्य सरकार ने प्रमोशन के मामले में कर्मचारियों को 50 फीसदी छूट दिए जाने का प्रावधान किया है।
क्या कहना है याची का?
याची का कहना था कि वह लघु सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता है। इन संशोधित नियमों से उसने आशंका जताई कि इनसे उसका व अन्य अर्ह लोगों का प्रमोशन रुक सकता है।
क्या है तर्क राज्य सरकार?
राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि सेवा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए संशोधित नियम बनाए गए हैं।
वर्ष 2008 से सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों में कोई प्रोन्नति नहीं हो सकी थी। ऐसे में सरकार के पास संशोधित नियम अपनाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।