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नीर भरे नैनन में नारी निहार रही, निज भाग्य की रेखा...

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चित्रकूट। हिंदी दिवस पर स्व. डा. देशराज पांडेय के स्थापित भारतीय साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कवियों ने अपने ओजस्वी, प्रेरणाप्रद व हास्य व्यंग्य से दर्शकों के बीच अमिट छाप छोड़ी।
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मुख्यालय के पुरानी कोतवाली परिसर के बाहर आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ हाईकोर्ट अधिवक्ता डा. बालकृष्ण पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर किया। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र व विशिष्ट अतिथि के रूप में पंकज अग्रवाल, रमेशचन्द्र द्विवेदी, रामबाबू गुप्ता, प्रेमचन्द्र यादव आदि मौजूद रहे। भाभा कान्वेंट स्कूल के संगीत शिक्षक वैभव जेजुल्कर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मप्र के सिंगरौली की कवयित्री विजयलक्ष्मी ने नीर भरे नैनन में नारी निहार रही, निज भाग्य की रेखा...प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। कवियत्री महक ने कोख में न मार मुझे, कर जोर विनती है, दुनिया में आने दे मां आना चाहती हूं की रचना दर्शाया। वृंदावन के अशोक अज्ञ ने टेढ़ी ही टेढ़ी कहे यमुना, टेढ़ी ही कूद कदंब की डाली, गजलकार शैलेन्द्र प्रताप सिंह रायबरेली ने अक्स ताजा तरीन रखता है, खूब खंजर हसीन रखता है उम्र भर दोस्तों में था शामिल, दुश्मनी वो महीन रखता है को श्रोताओं ने खूब सराहा।
एटा से आए कवि संजीव तनहा ने वंदना तेरी करू, तेरी करू आराधना गीत गाया। कवि अंजनी कुमार गीतऋषि रायबरेली ने भावना अभिव्यक्ति को जिसने दिए हैं शब्द इतना सोचिए आज तक उसके लिए कुछ न कर पाए रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्त्रस्म में कवियत्री प्रियंका त्रिपाठी, कवि संजय, कवि वीरेंद्र प्रताप सिंह भ्रमर ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस दौरान श्रीनारायण तिवारी, संदीप श्रीवास्तव, गीत, चुनकूराम राघव, शिवपूजन, प्रियंक प्रियदर्शन ने भी प्रस्तुतियां दी। संचालन कार्यकारी अध्यक्ष ध्रुवा त्रिपाठी ने किया। संस्था के महासचिव मनोज द्विवेदी ने अतिथियों के प्रति आभार जताते हुए कवियों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र व कामतानाथ की प्रतिमा भेंट की।
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