ददुआ के मारने के बाद जब पुलिस की टीम जीप से कोल्हुआ
के जंगल से निकल रही थी तो वहां घात लगाए बैठे ठोकिया ने हमला बोल दिया
था। हमले में छह एसटीएफ के जवान और एक मुखबिर की मौत हो गई थी।
ठोकिया
उर्फ डाक्टर उर्फ अंबिका पटेल सिलखोरी (भरतकूप) का रहने वाला था। बताया
जाता है कि बहन के साथ हुई छेड़छाड़ का बदला लेने को वह जंगल में कूदा था।
गांव का झोलाछाप डाक्टर बदले की आग में झुलसकर दुर्दांत बन गय। इसी क्षेत्र
के रहने वाले डाकिया (नाम) के लड़के ने उसकी बहन के साथ छेड़छाड़ की थी।
सजातीय
होने के चलते जब उसने उससे शादी करने का प्रस्ताव रखा तो मजाक उड़ाया गया
और ठोकिया के साथ मारपीट भी की गई। बीहड़ों में कूदने के बाद ठोकिया ने
पहली वारदात के रूप में डाकिया के दूसरे पुत्र को मार डाला और ऐलान किया कि
जो भी इसकी अर्थी को कंधा देगा, वह मेरा दुश्मन होगा।
तब भरतकूप
क्षेत्र का ओमनाथ पटेल आगे आया। उसने न केवल अर्थी को कंधा देकर अंतिम
संस्कार कराया, बल्कि ठोकिया के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया। विडंबना रही
कि जिसने बहन को छेड़ा था, वह ताउम्र ठोकिया के हाथ नहीं लगा। अलबत्ता अब
दुश्मनी का केंद्र सीधे सीधे ओमनाथ बन गया।
बिछियन (मप्र) में
ओमनाथ के परिवार के कई सदस्यों समेत तकरीबन आधा दर्जन लोगों को ठोकिया गैंग
से ही जुड़े सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने जिंदा फूंक दिया था। इसके बाद कई
जगहों पर ओमनाथ से गैंग की सीधे मोर्चाबंदी हुई पर ओमनाथ को हर बार भाग्य
का सहारा मिला। अंतत: चार अगस्त 2008 को अपने गांव के नजदीक सिलखोरी में
एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में सात लाख का इनामी ठोकिया मारा गया।
अब
दो जुलाई को कथित पुलिस मुठभेड़ में बलखड़िया की मौत ने जिले से आतंक के
एक और काले अध्याय का समापन कर दिया। अब गौरी यादव का गिरोह तो लिस्टेड है
ही, बलखड़िया के गिरोह में भी कई ऐसे नाम हैं, जो इस आपराधिक परंपरा को
जारी रख सकते हैं। कई छुटभैये गिरोहों का नाम भी है।