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ट्रैक्टर से खेत की जुताई कराने में दुगना भाड़ा किसानों को चुकाना पड़ रहा

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चित्रकूट। डीजल के दाम दुगने होने से खेती के कार्य करने वाले किसानों को दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस समय रबी का सजीन चल रहा है। ऐसे में खेतों की जुताई ट्रैक्टर से व सिंचाई डीजल इंजन से कराई जा रही है। वही जिन किसानों के पास खुद के ट्रैक्टर नहीं हैं वह किराए पर ट्रैक्टर ले रहे हैं। जिनको पहले की अपेक्षा अधिक धनराशि देनी पड़ रही है। पैदा होने वाले अनाज के भाव महज दस से 20 प्रतिशत ही बढे़ है। ऐसे में खेती से लाभ नहीं मिल रहा है।
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डीजल का रेट साल दर साल बढ़ता गया । जिसमें 2017 मेें 54.55 रुपये था। जो 2021 मेेें बढ़कर 96 रुपये करीब दोगुना हो गया। जबकि पांच वर्ष में गेहूं का रेट प्रति क्विंटल 1625 से बढ़कर 2015 रुपये व धान का 1550 से 1960 रुपये है। वहीं, मक्का 1750 रुपये से बढ़कर मात्र 110 रुपये 1870 रुपये पहुंच गया। जबकि डीजल के दाम दोगुने हुए हैं। किसानों के मुताबिक दो साल पहले ट्रैक्टर से खेत की जुताई के लिए सौ-डेढ़ सौ रुपये लगते थे। अब ढाई सौ रुपये लिए जा रहे हैं।
बराह माफी गांव के किसान राधेश्याम ने बताया कि उनके पास खुद का ट्रैक्टर है। जुताई तो नहीं देनी पड़ रही लेकिन डीजल महंगा होने से खेती करने में लागत अधिक लग रही है। जिससे खेती करने में लाभ नहीं मिल पा रहा।
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मानिकपुर गांव के उमाशंकर ने बताया कि भाड़े पर ट्रैक्टर लेकर जुताई कराता है। जिसमेें इस पिछले साल पांच बीघा मेें 600 रुपये लिए गए थे। अब 900 रुपये लिया है। डीजल ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
दुबारी गांव के किसान शंकर ने बताया कि अधिकतर किसान आज भी डीजल से जुताई करते है। जिसमेें इस समय डीजल के दाम अधिक बढ़ने से खेती करना अब लाभ नहीं रह गया, बल्कि घाटा हो रहा है।
पहाड़ी गांव के किसान राजकरन ने बताया कि डीजल के दाम बढ़ने से जुताई में दोगुना खर्च है। ट्रैक्टर खरीदने की इच्छा थी, लेकिन अब इसका खर्च वहन कर पाना मुश्किल है। इस बार बैलों से जुताई कराई है।
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