चित्रकूट। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने जिले के किसानों से कहा है कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के बारे में सोचें। फसल अवशेष खेतों में जलाकर सूक्ष्मजीवों को क्षति न पहुंचाएं। भूमि की उर्वरा शक्ति को प्रभावित न करें। पराली का प्रयोग जैविक खाद बनाने में किया जाए।
पुआल, पराली समीपवर्ती गोशाला को दान दें। पालतू पशुओं को चारे के रूप में खिलाएं। फसल अवशेष जला कर भूमि व पर्यावरण को प्रदूषित न करें। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में जिला स्तरीय मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है। जिसके सदस्य सचिव जिला कृषि अधिकारी होंगे। इस सेल में जिले के आला अफसरों को रखा गया है जो फसल अवशेष जलाने की सतत निगरानी करते रहेंगे और मामला प्रकाश में आने पर विधिक कार्रवाई कराएंगे। इसी तरह तहसील स्तर पर एसडीएम उड़नदस्ता प्रभारी होंगे। जिनके साथ पुलिस क्षेत्राधिकारी व कृषि विभाग के अधिकारी समन्वय कर पराली व कृषि अपशिष्ट जलाने पर नजर रखेंगे। डीएम ने प्रधानों को पत्र लिखकर आह्वान किया है कि एक भी पराली जलाने की घटना न होने दें। लोगों को फसल अवशेष खेत में ही सड़ाकर खाद बनाए जाने के लिए प्रेरित करें। कृषि विभाग के बीज गोदामों में वेस्ट डिकंपोजर निशुल्क उपलब्ध है। उसके द्वारा पराली को सड़ाकर खाद बनाएं।