चित्रकूट। जिले में कभी डाकुओं से प्रभावित रहे क्षेत्रों में इस बार होली पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कई गांवों में तो एक दिन पहले से ही डीजे बजना शुरू हो गए हैं। कोल आदिवासी फाग गाने में जुट गए हैं।
मानिकपुर के पाठा तथा भरतकूप क्षेत्रों में दस्युओं के कारम पहाड़ों के नीचे बसे गांवों में लोग पहले होली घर के अंदर मनाते थे। कोई गांव में बाहर होली नहीं मनाता था। खासकर पाठा क्षेत्र में हालत बहुत खराब थे। पिछले कुछ सालों में एक-एक कर दस्युओं का खात्मा हो गया। इसी साल साढ़े पांच लाख रुपये का इनामी गौरी यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसका बहिलपुरवा क्षेत्र से लेकर मानिकपुर तक बहुत आतंक था। गैंग के सदस्य आए दिन गांवों में मारपीट कर लूटपाट करते रहते थे। मौका पाने पर अपहरण कर ले जाते थे। विकास कार्यो में भी कमीशन मांगा जाता रहा है।
इसी के पहले मानिकपुर क्षेत्र के पाठा क्षेत्र में 6 लाख रूपये का इनामी दस्यु बबुली व लवलेश भी मार दिया गया। इसके बाद कोई नवोदित गैंग तैयार नहीं हुआ। जिससे अब क्षेत्रीय लोगों को काफी राहत है। मानिकपुर क्षेत्र के रानीपुर गांव के राजेश द्विवेदी, गिदुरहा के राजन कोल ने बताया कि क्षेत्र से आतंक खत्म हो जाने के कारण इस बार होली का पर्व अधिक उत्साह से मनाया जा रहा है। (संवाद)
चित्रकूट। होली के पर्व के ही दिन जिले की सीमा से सटे नया गांव थाना क्षेत्र अंतर्गत बिछयन में एक बार डाकू रागिया ने जलती होलिका में एक ग्रामीण को जिंदा जला दिया था। इसके साथ कई ग्रामीणें को पीट-पीटकर घायल कर दिया था। आज भी लोग उस घटना को याद कर डर जाते हैं। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में जिले में मजदूर तबक े के लोग पलायन कर शहरों में चले जाते है। जो होली का पर्व के एक दिन पहले अपने अपने घरों में आ गए हैं। (संवाद)