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चित्रकूट : आंख बनवाकर निकले वृद्ध की संदिग्ध हालात में मौत, अस्पताल की एंबुलेंस ने कर्वी बस स्टैंड पर छोड़ दिया था, बस की सीट पर मृत मिले

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फोटो-9- घटना की जानकारी देते मृतक के परिजन। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड के एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। आंख के मरीज को घर न भेजकर बस स्टैंड में छोड़ दिया गया। मरीज किसी तरह प्राइवेट बस में तो बैठ गया, लेकिन घर नहीं पहुंच सका। बस चलने के पूर्व ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आधारकार्ड के जरिए शिनाख्त कर परिजनों को जानकारी दी।
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रैपुरा थाना क्षेत्र के लोखरीपुरवा निवासी भोला प्रसाद ने बताया कि 21 जुलाई को सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय की आंखों का इलाज करने वाली टीम ने रैपुरा थाना क्षेत्र के इटवा के मजरा लोखरीपुरवा में कैंप लगाया था। इसमें उनके पिता बाबूलाल (77) व रैपुरा के केशव को आंख बनवाने की सलाह दी गई। दोनों राजी हुए तो उन्हें चित्रकूट स्थित सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय लाया गया। आरोप है कि बुधवार की सुबह छुट्टी होने पर एंबुलेंस कई मरीजों को छोड़ने निकली। कर्वी बस स्टैंड में एंबुलेंस चालक ने बाबूलाल और केशव को उतार दिया। कहा गया कि एंबुलेंस राजापुर की ओर जाएगी। ऐसे में वह बस से घर चले जाएं। इसके बाद दोनों को उतारकर एंबुलेंस लेकर चले गए। बाबूलाल और केशव घर जाने के लिए प्राइवेट बस में बैठ गए। बस गंतव्य के लिए रवाना होने के पूर्व बाबूलाल की मौत हो गई। बस चालक ने शव को नीचे उतारकर पुलिस को सूचना दी। जबकि बाबूलाल घर की ओर निकल पड़ा। पुलिस ने आधारकार्ड के जरिए शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दी।
पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के पुत्र भोला प्रसाद ने कहा कि बिना बताए बस स्टैंड में छोड़ दिया गया। मृतक के पांच पुत्र, दो पुत्रियां हैं। कोतवाल अशोक सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया हार्टअटैक लगता है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से सही जानकारी होगी।
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वर्जन
रैपुरा क्षेत्र के केवल यही दोनों मरीज थे। इनकी छुट्टी एक दिन पहले हो गई थी। ये अस्पताल में ही बने रहे। उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि रूट अलग होने से उन्हें कर्वी से बस से जाना होगा। कर्वी बस स्टैंड पर दोनों को किराया भी दिया गया। बाबूलाल की मौत की सूचना पर अस्पताल की टीम पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी। - डॉ. इलेश जैन, एडमिनिस्ट्रेटर, जानकीकुंड अस्पताल
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