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कब कहां बम गिर जाए कोई ठिकाना नहीं था

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फोटो नंबर- 13 - यूक्रेन से लौटे आकाश गुप्ता ने घर पहुंचने पर पिता रामबाबू के साथ सबसे पहले मंदिर में ? - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। यूक्रेन से लौटे शहर निवासी आकाश गुप्ता से मिलने के लिए बेताब उनके माता पिता सहित स्थानीय निवासियों ने जिला मुख्यालय आने पर जोरदार स्वागत किया। बेटे के पहुंचने पर माता पिता का आसुओं के रूप में प्यार छलकता रहा। बेटे की भी आंखें भर आईं। कस्बावासियों व भाजपाइयों ने माला पहनाकर स्वागत किया। यूक्रेन से अपने घर पहुंचे आकाश गुप्ता ने बताया कि यूक्रेन में बहुत भयावह स्थिति है। सब कोई अपनी जान बचा रहा है। कब कहा बम गिर जाए कोई ठिकाना नहीं है।
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शहर के रोडवेज बस स्टैंड निवासी ठेकेदार रामबाबू गुप्ता का एमबीबीएस छात्र पुत्र आकाश गुप्ता यूक्रेन में फंसा था। वह शुक्रवार को प्रयागराज तक हवाई जहाज से पहुंचे फिर चित्रकूट चौपहिया वाहन से अपने घर पहुुंचे। बेटे से मिलने के लिए आतुर मां सुशीला गुप्ता ने जैसे ही अपने पुत्र को आते देखा तो दौड़कर उसे गले लगा लिया। दोनों के आंसू झलक आए। आकाश ने अपने माता पिता के पैर छूने के बाद घर के पास स्थित मंदिर में भगवान के दर्शन कर पूजा की। आकाश वर्ष 2017 मेें एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गया था। इस बार अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। आकाश ने बताया कि आज भी वहां का मंजर की याद आ जाती है तो डर लगने लगता है। भारतीय झंडा लेकर चलने पर सैनिक हमला नहीं बोलते थे। उन्होंने बताया कि 24 तारीख को जब रूस ने हमला किया तो इजरायल दूतावास ने अपने देश के निवासियों से देश छोड़ने की सलाह दी।
इसके बाद भारतीय छात्रों ने अपने दूतावास में संपर्क किया तो कहा गया कि जाना चाहे तो चले जाएं। इसके बाद जब छात्रों ने यूक्रेन से जाने की योजना बनाई तो एक छात्र का हवाई जहाज का किराया एक लाख रुपये मांगा गया जबकि मूल किराया 25 हजार रुपये है। इतने रुपये न होने पर दूतावास से कोई सहारा नहीं मिला और भयभीत छात्र पैदल ही देश की सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सांसद आरके पटेल, विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, पकंज अग्रवाल, श्याम गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने माला पहनाकर स्वागत किया।
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दिखा सद्भाव, अरशद ने बहुत सहयोग किया
यूक्रेन से आए आकाश गुप्ता ने बताया कि रूस यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने पर साथी छात्र-छात्राओं ने भारत आने की तैयारी शुरू कर दी थी। हम लोग एक बस से कि सी तरह से रोमानिया पहुंचे। इस काम में उनके सहपाठी अरशद ने बहुत सहयोग किया। रोमानिया पहुंचने पर उनका बहुत स्वागत किया गया। इसी देश के एक पत्रकार ने उनके सभी साथियों की बड़ी मदद की।
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