चित्रकूट। पवित्र नगरी में मंदाकिनी के घाटों पर अतिक्रमण है। नाविकों ने मनमाने ढंग से नदी में घाटों पर नावों को खड़ा कर रहे हैं। इससे न केवल स्नानार्थियों, बल्कि विशेषकर महिलाओं को गंभीर परेशानी हो रही है।
श्रद्धालु कहते हैं कि वे भगवान राम की पवित्र भूमि में आते हैं, पर नाविकों के व्यवहार से परेशान हैं। रामघाट, बालाघाट और भरत घाट में नावों का झुंड घाट किनारे खड़ा रहता है। नावों की रस्सियां घाट की सीढ़ियों से बांध दी जाती हैं। इससे आवाजाही में बाधा आती है। महिलाओं का कहना है कि कई बार तो सवारियों से भरी नावें भी सीधे स्नान करने वाले स्थान पर लगा दी जाती हैं।
कहने के बाद भी नाविक अपनी नाव नहीं हटाते। इससे पवित्र मंदाकिनी में स्नान करने का अनुभव सुखद होने के बजाय कष्टदायक हो जाता है। इसके अतिरिक्त, नावों से बजने वाले फिल्मी और भोजपुरी के अभद्र गानों ने वातावरण को और भी दूषित कर दिया है। श्रद्धालु भगवान राम की पवित्र भूमि में आध्यात्मिक शांति की तलाश में आते हैं, लेकिन नावों के कारण उन्हें इस तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
-
कानपुर से आई ममता देवी कहती हैं कि घाट पर नावों के खड़े रहने और लोगों के बैठे रहने से स्नान करने में बहुत दिक्कत होती है। कहने पर भी लड़के हटते नहीं हैं। नावों को किसी निर्धारित स्थान पर खड़ा किया जाना चाहिए जहां स्नान न होता हो।
-
प्रयागराज से आए श्रद्धालु रमेश कुमार बताते हैं कि रामघाट पर ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां नावें खड़ी न हों। कई बार तो सवारियों से भरी नाव ही स्नान करने की जगह पर लगा दी जाती है। इससे परेशानी होती है और नावों से बजने वाले गाने माहौल को खराब कर रहे हैं।
नावों से फिल्मी गीतों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नावों के पंजीकरण के लिए स्टॉल लगाए जा रहे हैं और नावों को खड़ा करने के लिए एक स्थान भी तय किया जा रहा है।
-पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी।
फोटो 10 सीकेटीपी-14-भरत घाट के पास घाट किनारे खड़ी नावें। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी-14-भरत घाट के पास घाट किनारे खड़ी नावें। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी-14-भरत घाट के पास घाट किनारे खड़ी नावें। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी-14-भरत घाट के पास घाट किनारे खड़ी नावें। संवाद