ट्रेनों में लंबी वेटिंग के समय रिजर्वेशन कोटे से सीट हासिल करने के लिए स्टेशनों की बोर्डिंग बदलने का गणित अब काम नहीं करेगा।
रेलवे अपने रिजर्वेशन कोटे से केवल उस स्टेशन से यात्रियों को सीट आवंटित करेगा, जहां से टिकट बनवाया गया है। बीच के स्टेशन की बोर्डिंग कराने के बावजूद पिछले स्टेशन से ही रिजर्वेशन कोटा दिया जा सकेगा।
एक अगस्त 2013 तक यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी।
रेलवे बोर्ड के निदेशक ट्रैफिक कामर्शियल डॉ. एसके अहिरवार ने सभी सेंटर फॉर रेलवे इंफारमेशन सिस्टम (क्रिस) को अपने सॉफ्टवेयर में संशोधन करने के दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
इमरजेंसी कोटा, एचओआर, डिफेंस और फॉरेन टूरिस्ट सहित कई तरह के रिजर्वेशन कोटे से सीट हासिल करने के लिए लोग पिछले स्टेशनों से टिकट बनवाकर उसकी बोर्डिंग बीच के स्टेशनों से कर देते थे।
इनमें रेलवे अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में यात्री भी होते हैं। इससे जिस स्टेशन से टिकट बना होता है और जहां की बोर्डिंग बदली जाती है, उस बीच ट्रेन की सीट खाली रह जाती है।
मसलन, ट्रेन 14257 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से वाराणसी से दिल्ली का टिकट बनवाकर रिजर्वेशन कोटे से सीट हासिल करने के लिए उसकी बोर्डिंग लखनऊ कर दी जाती है।
ऐसे में लखनऊ से कोटा तो आवंटित हो जाता है लेकिन वाराणसी से लखनऊ तक ट्रेन की सीटें खाली आती हैं।
इस कारण वाराणसी से लखनऊ आने वाले वेटिंग के यात्रियों को सीटें नहीं मिल पाती हैं। क्रिस मुंबई अपने यहां टिकट पर दर्ज आरंभिक स्टेशन पर ही रिजर्वेशन कोटा आवंटित करता है।
बोर्डिंग बदलने पर वह बीच के स्टेशनों पर रिजर्वेशन कोटे से सीटें नहीं देता है। क्रिस दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता अब भी बीच के स्टेशन की बोर्डिंग कराने पर वहीं से रिजर्वेशन कोटा आवंटित कर रहा है।
रेलवे बोर्ड ने इस पर नाराजगी जताई है। अकेले उत्तर रेलवे लखनऊ रेल मंडल कार्यालय में रिजर्वेशन कोटे से सीट हासिल करने लिए लगभग दो हजार और पूर्वोत्तर रेलवे मंडल कार्यालय में डेढ़ हजार से अधिक आवेदन आते हैं।
अब दिल्ली क्रिस के सॉफ्टवेयर में संशोधन के बाद बोर्डिंग बदलकर रिजर्वेशन कोटे से सीट हासिल करने की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।