दीवानी न्यायालय भवन निर्माण एवं जिला मुख्यालय के विकास के लिए अधिवक्ताओं ने सोमवार को सदर कचहरी में जनजागरण किया। साथ ही न्यायिक अफसरों से मुलाकात कर न्यायिक कार्य को ठप कर जिला मुख्यालय निर्माण में सहयोग का आग्रह किया। इसके बाद सदर कचहरी परिसर पहुंचकर अधिवक्ताओं ने धरना दिया। अधिवक्ताओं ने चेताया कि यदि पांच दिनों के बाद दीवानी न्यायालय निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का आवंटन नहीं किया गया तो अधिवक्ता छठें दिन जनपद एवं सत्र न्यायालय के समक्ष चिता लगाएंगे। इसके बाद भी जिला प्रशासन की हठधर्मिता कायम रही तो 11वें दिन अधिवक्ता सामूहिक रूप से आत्मदाह करने को विवश होंगे।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सिंह ने कहा कि जिला मुख्यालय के विकास व जनपद न्यायालय के अधिवक्ता हर चौकठ पर मत्था टेक चुके हैं। लेकिन जनपद न्यायालय के निर्माण के लिए अब तो कोई प्रभावी पहल नहीं की गई। जिला प्रशासन जहां शिथिल व लापरवाह है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। सिविल बार महामंत्री धनंजय सिंह ने कहा कि जिस तरह से एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत जिले में काबिज सरकारी दफ्तरों को वाराणसी के करीबी इलाके में स्थापित करने का प्रयास हो रहा है। वह जिले की जनता व अधिवक्ताओं के साथ धोखा है। इस दौरान मुरलीधर सिंह, जिला एवं न्यायालय निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेश मिश्रा, उज्ज्वल सिंह, चन्द्रभानु सिंह, अनिल कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह, अभिनव आनंद आदि उपस्थित रहे। संचालन राकेश रत्न तिवारी व शमशुद्दीन ने संयुक्त रूप से किया।