पडा़व। क्षेत्र के सीतापुर नई डांडी स्थित सद्गुरु कबीरमठ की स्थापना पर चल रहे दो दिवसीय सत्संग के दूसरे दिन भजन कीर्तन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसके पूर्व सत्संग में वक्ताओं ने सुंदर समाज की स्थापना ही सद्गुरु कबीर का मूलमंत्र बताया।
कार्यक्रम के संयोजन मठ के महंत आनंददास महाराज ने कहा कि संत कबीर की वाणी सभी वर्गों को राह दिखाती है।
कबीरचौरा मठ मुलगादी के महंत आचार्य विवेक दास ने कहा कि आज हम दंभ झूठ कपट के व्यापारी बन गए हैं। जगत का प्रपंच हमें घेरे हुए है। गुरु के आशीर्वाद से ही यह सांसारिक प्रपंच से पार पा सकते हैं। सहरसा बिहार से आए महंत रामस्वरूप शास्त्री ने कहा कि मनुष्य जब दूसरे के ज्ञान सम्मान से व्यवहार करने लगता है तो उसका आचार व्यवहार शिथिल पड़ने लगता है। चित्रवृत्ति बिगड़ जाती है। समाज संरचना में बंधन डालता है। व्यक्ति को अभिमानी नहीं होना चाहिए। कवि साहित्यकार डॉ. जय शंकर जय ने कहा धर्म मानवता का पोषक है। धर्म में अंधविश्वास की जगह विवेक का प्रयोग होना चाहिए। ज्ञान से ही हम काम क्रोध एवं शोक के पिशाच से छुटकारा सकते हैं। इसके पहले मिर्जापुर से आए रामानंद विश्वकर्मा और रामाश्रय दास, गोपाल दास, विजय बहादुर, और ओमप्रकाश दास ने गीतों से भक्तों आनंदित किया। इस अवसर पर आयोजित भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर आचार्य गुरु प्रसाद गोस्वामी, महंत ज्ञान प्रकाश, महंत रामधनी साहब, डॉ. सतनाम साहब ,महंत शिवमुनि शास्त्री, महंत चेतनदास आचार्य, महंत ब्रजेशमुनी दास, महंत दुखहरण दास, कुशेश्वर यादव, डॉ. रामकुबेर यादव, राजेंद्र प्रसाद, राजकिशोर ,सत्यनारायण, हरीनाथ, सुमन, माया रानी, अंबुजा महेश्वरी, प्रज्ञा गोपाल, गौरव ,गुरु प्रसाद रहे।