कंदवा। जामवंत जैसे सुयोग्य मंत्री, अंगद जैसा युवराज और हनुमान जैसे राष्ट्रप्रेमी नौजवान के होने से ही किसी भी राष्ट्र का विकास होता है। जब युवाओं के हृदय में बुजुर्गों के प्रति सम्मान होगा तो उस राष्ट्र का विकास होने से कोई रोक नहीं सकता। ये बातें कम्हरिया गांव में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन रविवार को शशिकांत जी महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आज के नौजवानों को हनुमान जी के चरित्र से प्रेरणा लेने की जरूरत है। हनुमान जी में भरपूर शक्ति भरी पड़ी थी लेकिन जब जामवंत जी ने जगाया तब उनको अपनी शक्ति का एहसास हुआ। आज के वृद्ध जामवंतों को भी चाहिए कि वे समय-समय पर युवा हनुमानों को जगाते रहें जिससे वे अपने धर्म, राष्ट्र व अपनी संस्कृति के लिए अच्छा कार्य करते रहें। कहा कि जब राम और रावण का युद्ध प्रारंभ हुआ तो रावण की सेना में सब के पास अस्त्र-शस्त्र थे पर बंदर-भालुओं के पास नाखून, पत्थर व पेड़ की टहनियां थीं। इसके बावजूद राम की विजय हुई और रावण पराजित हुआ। इस मौके अच्युतानंद त्रिपाठी, उदय प्रताप सिंह, ममता, सतीश सिंह, संजय रहे। संचालन आचार्य राममिलन पाठक ने किया।