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Russia Ukraine Crisis : यूक्रेन में फंसे चंदौली के भी दो चचेरे भाई, एक बंकर में तो दूसरे ने हॉस्टल में ली शरण

Sat, 26 Feb 2022 05:33 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली

सार

चंदौली के डिग्गी गांव निवासी दो चेचेरे भाई यूक्रेन में फंसे हुए हैं। एक अपने कॉलेज के हॉस्टल में है तो वहीं दूसरे ने एक बंकर में सरण ली है। 
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अदनान शाह और शाकीफ कयूम शाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रूस द्वारा यूक्रेन पर हुए हमले से भारतीयों का भी दिल बैठा है। युद्ध की वजह से वहां फंसे भारतीय छात्र चिंता का कारण बने हैं। यूक्रेन की बिगड़ी स्थिति की आंच अब धान के कटोरे कहे जाने वाले चंदौली में भी पहुंच चुकी है। चंदौली के डिग्गी गांव निवासी दो चेचेरे भाई यूक्रेन में फंसे हुए हैं। दोनों यूक्रेन मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे।  

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परिजनों को पहले दिन से मालूम था पर उन्होंने यह सूचना शनिवार को सार्वजनिक की। सूचना के बाद युवकों के घर पर नाते- रिश्तेदारों के अलावा क्षेत्र के लोगों की भीड़ जुटी है। सभी युवकों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

चंदौली से सटे डिग्गी गांव निवासी मुनउव्वर अली के बेटे अदनान शाह और उनके भाई शहजाद अहमद के पुत्र शाकीफ कयूम शाह मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। अदनान वी.एन.कजरिया खर्किव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी का छात्र है, वहीं शाकीफ कयूम हेलिट स्काई लविव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी का छात्र है। दोनों अपनी यूनिवर्सिटी वाले शहर में ही निवासरत है।
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यूक्रेन-रूस के बीच तनाव बढ़ा तो इन दोनों के परिवार के लोगों की चिंताएं बढ़ी और उन्होंने टेलीफोनिक बातचीत करके अपने बच्चों की सलामती जानी। इस बीच दोनों देशों में जंग छिड़ जाने पर एकाएक परिवार के लोग परेशान हो गए।

युद्ध की स्थिति के बीच जहां पूरा परिवार टेलीविजन पर नजर टिकाए हुए है, वहीं बच्चों से सम्पर्क करके उनके सलामत होने की पुष्टि लगातार की जा रही है। परिवार के लोगों के मुताबिक फिलहाल दोनों सलामत हैं और जगह-जगह स्थानों पर स्थानीय लोगों के साथ टिके हुए है।
 
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अदनान जहां युद्ध की स्थिति में खुद को बचाने के लिए बंकर में शरण लिए हुए है, वहीं शाकीफ कयूम शाह अपने हास्टल में ही अन्य साथी छात्रों के साथ हैं। फिलहाल परिवार के लोग अपने बच्चों की सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं और उनकी सकुशल वापसी की कामना की जा रही है। दोनों छात्रों ने अंतिम बातचीत में बताया कि फिलहाल वहां की स्थिति ठीक है और वे खाने-पीने व जरूरी सामान लेने के लिए बंकर से बाहर आए हैं, लेकिन उन्हें पुनः बंकर में ही शरण लेनी है।
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