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जीवन को मर्यादित बनाता है धर्म: जीयर स्वामी

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धानापुर। धर्म सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि व्यवहार में भी होना चाहिए। दुनिया धर्म पर टिकी है। जड़ और चेतन दोनों का अपना-अपना धर्म होता है। धर्म हमारे जीवन को मर्यादित बनाता है। मानव यदि अपने धर्म से विमुख हो जाए तो संसार का संचालन रुक जाएगा।
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ये बातें क्षेत्र के बुढ़ेपुर में चल रहे चतुर्मास यज्ञ के दौरान शनिवार को जीयर स्वामी ने कहीं। कहा कि धर्म से अभिप्राय सिर्फ पूजा-वंदना ही नहीं है। जो जिस निमित्त है उसके द्वारा संबंधित कार्य का संपादन ही उसका धर्म है। संसार का संचालन धर्म के आधार पर ही हो रहा है। धर्म या स्वभाव के कारण ही वस्तुओं व प्राणियों का वजूद है। कहा मनुष्य में एक गुण ऐसा है, जो मानवेतर जीवों में नहीं पाया जाता है। वह है धर्म। धर्म मानव का विशेष गुण है जिसके कारण वह पशु से भिन्न है। धर्म हमारे जीवन की वह पद्धति है जिसके अनुपालन से पतन रुक जाता है और मनुष्य पावन हो जाता है। सूत जी ने कहा है कि 18 पुराणों में दो बातों का महत्व विशेष है। परोपकार से बड़ा कोई धर्म व पुण्य नहीं और अकारण किसी को दंड देने से बड़ा कोई पाप नहीं। जो दूसरे की पीड़ा समझे उससे बड़ा वैष्णव कोई नहीं हो सकता। पीड़ित के प्रति दया रखना, गरीब कन्या का विवाह और गरीब बच्चे को शिक्षा देना परोपकार है।
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