लीला के दौरान कई बार की चमत्कारिक घटनाएं होने के भी किस्से हैं। माना जाता है कि लीला में देवता भी आते हैं। इस रामलीला में श्रीराम की भूमिका के लिए चयन होना सौभाग्य से कम नहीं माना जाता। श्रीराम की भूमिका निभाने वाले बालक को लोग श्रीराम का स्वरूप मानते हैं।
पिछले वर्ष सीता की भूमिका में थे इस बार के राम
रामनगर की रामलीला में पिछले तीन साल से चंदौली के बालक ही श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। 2022 में राम की भूमिका चंदौली के धानापुर विकासखंड के नौघरा गांव निवासी गौरव उपाध्याय ने निभाई थी। चंदौली के ही दिव्यांशु चौवे को सीता की भूमिका और लक्ष्मण की भूमिका चंदौली के आदित्य पाठक को मिली थी।
2023 में नियामताबाद विकासखंड के रंगौली के दीपक पांडेय श्रीराम बने थे तो मारूफपुर सैदपुर के अथर्व पांडेय सीता की भूमिका में थे। नियामतावाद के ही अंश तिवारी ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी। 2023 में सीता की भूमिका निभाने वाले मारूफपुर निवासी अर्थव पांडेय को श्रीराम की भूमिका के के लिए चुना गया है।
राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और जानकी के भूमिका के लिए पात्रों का चयन हर वर्ष 25-30 बालकों में से कठिन स्वर परीक्षा के बाद होता है। चयन के बाद एक महीने तक पात्रों को तपस्वी जैसा जीवन जीना पड़ता है। परिवार से अलग होकर कठोर अनुशासन के बीच प्रशिक्षण दिया जाता है। सादा भोजन और नंगे पांव रहना पड़ता है।