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हत्या के मामले में नौ पुललिस कर्मी 25 वर्ष बाद दोषमुक्त

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चंदौली। विशेष न्यायाधीश(एससी/एसटी एक्ट) अम्बर रावत ने शुक्रवार को एक हत्या के मामले की सुनवाई की। उन्होने अलीनगर पुलिस के द्वारा इनकाउंटर में मारे गए दो लोगों के हत्या के मामले में साक्ष्यों के अभाव में नौ पुलिस कर्मियों को दोषमुक्त करार दिया। प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता चंद्रमौली उपाध्याय ने कोर्ट में साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत किया।
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वादी अशोक कुमार ने कोर्ट में मुकदमा दायर कराया था कि 20 मार्च 1996 को नई दिल्ली के निवासी शिवराज सिंह, जोर सिंह और संजय सिंह एक डेडबाडी को प्राइवेट एंबुलेंस से बिहार पहुंचाने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान अलीनगर थाने की पुलिस ने रात्रि में वाहन में बैठे लोगों को घेरकर गोली चला दी। जिसमें जोर सिंह और संजय सिंह की मौके पर मौत हो गई। जबकि शिवराज ने किसी प्रकार भागकर जान बचाई। इसी मामले में कोर्ट के आदेश पर अलीनगर में तैनात कुल 14 पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया और विवेचना को सीबीसीआईडी को सुपुर्द कर दिया गया। लेकिन कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पांच आरोपी पुलिस कर्मियों की मौत हो गई। इसी मामले की विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) अम्बर रावत ने सुनवाई की। उन्होने वादी और प्रतिवादी के अधिवक्ता के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और तर्क के आधार पर नौ पुलिस कर्मियों सतिराम चौरसिया, रामशकल यादव, हरिनाथ पांडेय, रामप्रताप सिंह, वीरेंद्रनाथ तिवारी, रविंद्रनाथ तिवारी, समरेंद्र तिवारी, अरविंद सिंह, मंगला यादव को दोषमुक्त करार दिया। प्रतिवादी पक्ष से अधिवक्ता चंद्रमौली उपाध्याय ने कोर्ट में साक्ष्यों और तर्क प्रस्तुत किया।
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