पीडीडीयू नगर। गर्मी शुरू होते ही आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए जिले में संसाधन ही नहीं हैं। पीडीडीयू नगर स्थित फायर स्टेशन पर पूरे जिले की आग बुझाने की जिम्मेदारी है। सकलडीहा, चकिया, नौगढ़ और रामनगर इंडस्ट्रीयल एरिया में जमीन के अधिग्रहण के बाद फायर स्टेशन की स्थापना नहीं हो सकी।
जिले की आबादी बीस लाख से अधिक है। कृषि प्रधान जनपद में आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं फसलों में होती है। खेत खलिहान में आग लगने पर फायर ब्रिगेड के वहां पहुंचते-पहुंचते किसानों की पूरी मेहनत जलकर राख हो जाती है। एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड यहीं है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में पांच सौ से अधिक इकाइयां हैं, जहां हर वर्ष अगलगी की घटनाएं होती हैं। पिछले वर्ष जिले में 105 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुई थीं। इतने बड़े जिले में आग पर काबू पाने के लिए चंदौली और पीडीडीयू नगर के नाम दो फायर स्टेशन हैं। विडंबना यह है कि चंदौली जिला मुख्यालय का फायर ब्रिगेड भी पीडीडीयू नगर स्थित फायर स्टेशन से संचालित होता है। वर्षों पहले चंदौली के साथ सकलडीहा, नौगढ़, चकिया और रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण किया गया था लेकिन आज तक फायर स्टेशन नहीं खुला। सकलडीहा में प्रशासनिक भवन बनकर तैयार है। यही नहीं चंदौली और पीडीडीयू नगर फायर स्टेशन में निरीक्षक की तैनाती नहीं की गई है। फायर ब्रिगेड के पास पांच हजार लीटर, साढ़े चार हजार लीटर के एक एक फायर ब्रिगेड वाहन हैं। वहीं ढाई हजार लीटर क्षमता के दो और चार सौ लीटर क्षमता वाले फायर वाहन तीन हैं। जरूरत के हिसाब से इन वाहनों को सकलडीहा, चकिया और चंदौली कोतवाली पर तैनात किया जाता है।
पीडीडीयू नगर। संसाधनों की कमी से जूझ रहा फायर ब्रिगेड आग बुझाने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दे रहा है। लगातार स्कूलों में प्रशिक्षण अभियान चलाकर छात्रों को आग पर काबू पाने, जान माल की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण देता है।
पीडीडीयू नगर। यदि चंदौली, सकलडीहा, चकिया, नौगढ़ और इंडस्ट्रीयल एरिया में फायर ब्रिगेड की स्थापना हो जाती तो न सिर्फ संसाधन बढ़ जाते बल्कि फायर फाइटर और अधिकारियों की संख्या बढ़ जाती। आग लगने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड पूरी तरह तत्पर है। संसाधनों की कुछ कमी है। यदि प्रस्तावित स्थलों पर फायर ब्रिगेड बन जाते तो आग बुझाने में आसानी हो जाती। फायर ब्रिगेड भवन निर्माण के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
सुभाष सिंह मुख्य अग्निशमन अधिकारी, चंदौली
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गर्मी की शुरुआत होते ही अगलगी की घटनाएं शुरू हो गई हैं। जिले में आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं गेहूं के खेत में आग लगने की होती है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों और रेलवे यार्ड में आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। बावजूद इसके आग से बचाव के लिए अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त साधन ही नहीं है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय पर आज तक फायर ब्रिगेड की स्थापना नहीं हो सकी है। सकलडीहा, चकिया, नौगढ़, रामनगर इंडस्ट्रीयल एरिया में फायर ब्रिगेड प्रस्तावित है। ऐसे में सीमित साधन से आग से होने वाले नुकसान से बचाव मुश्किल होती है।
जिले की आबादी बीस लाख से अधिक है। कृषि प्रधान जनपद में आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं फसलों में होती है। खेत खलिहान में आग लगने पर फायर ब्रिगेड के वहां पहुंचते पहुंचते किसानों की पूरी मेहनत जलकर नष्ट हो जाती है। एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड यहीं है। यहां भी आए दिन आग लगने की घटनाएं होती है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र की पांच सौ से अधिक इकाईयों में भी प्रति वर्ष आग लगने की घटनाएं होती है। पिछले वर्ष जिले में 105 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुई थी। इतने बड़े जिले में आग पर काबू पाने के लिए चंदौली और पीडीडीयू नगर के नाम दो फायर स्टेशन की स्थापना की गई है। विडंबना यह है कि चंदौली मुख्यालय का फायर ब्रिगेड भी पीडीडीयू नगर स्थित फायर स्टेशन से ही संचालित होता है। वर्षों पहले चंदौली के साथ सकलडीहा, नौगढ़, चकिया और रामनगर इंडस्ट्रीयल एरिया में फायर ब्रिगेड स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। भूमि अधिग्रहित कर ली गई लेकिन आगे का काम नहीं हुआ। सकलडीहा में प्रशासनिक भवन बनकर तैयार है। यही नहीं चंदौली और पीडीडीयू नगर फायर स्टेशन में निरीक्षक की तैनाती नही की गई है। वर्तमान में फायर ब्रिगेड के पास पांच हजार लीटर, साढ़े चार हजार लीटर के एक एक फायर ब्रिगेड वाहन हैं। वहीं ढाई हजार लीटर क्षमता के दो और चार सौ लीटर क्षमता वाले फायर वाहन तीन हैं। जरूरत के हिसाब से इन वाहनों को सकलडीहा, चकिया और चंदौली कोतवाली में खड़ा किया जाता है।
इनसेट-
प्रशिक्षण के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश
पीडीडीयू नगर। संसाधना की कमी से जूझ रहा फायर ब्रिगेड आग बुझाने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दे रहा है। लगातार स्कूलों में प्रशिक्षण अभियान चलाकर छात्रों को आग पर काबू पाने, जान माल की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण देता है।
इनसेट-
बन जाते फायर ब्रिगेड तो होती आसानी
पीडीडीयू नगर। यदि चंदौली, सकलडीहा, चकिया, नौगढ़ और इंडस्ट्रीयल एरिया में फायर ब्रिगेड की स्थापना हो जाती तो न सिर्फ संसाधन बढ़ जाते बल्कि फायर फाइटर और अधिकारियों की संख्या बढ़ जाती। सीमित क्षेत्रों की जिम्मेदारी होने की वजह से अग्नि स्थल तक जल्दी वाहन पहुंचते और आग पर काबू पाया जा सकता था।
कोट-
आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड पूरी तरह तत्पर है। संसाधना की कुछ कमी है। यदि प्रस्तावित स्थलों पर फायर ब्रिगेड बन जाते तो आग बुझाने में आसानी हो जाती। फायर ब्रिगेड भवन निर्माण के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
सुभाष सिंह
मुख्य अग्निशमन अधिकारी, चंदौली
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र