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संतों के दर्शन और सत्संग से मानव का कल्याण होता है

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संतों के दर्शन और सत्संग से मानव का कल्याण होता है
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संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-05
कंदवा। संतों के दर्शन और सत्संग से मानव का कल्याण होता है। संत और सत्संग चलते फिरते तीर्थ हैं। जहां मानव का कल्याण होता है। बिना सत्संग के मनुष्य चारों तरफ भटकता रहता है। सत्संग संत, महात्माओं, मनीषियों और सद्गुरुओं की शरण में जाने के बाद ही मिलता है। ये बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास के दौरान मंगलवार को सुंदरराज महाराज ने कही।
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कहा कि सन्त और सत्संग के सानिध्य में रहकर मनुष्य अपने जीवन को धन्य कर सकता है। संत का दर्शन और सत्संग का फल मानव जाति के लिए लाभदायक होता है। संत और सत्संग हमेशा उत्तम राह दिखाते हैं। इसमें मानव का कल्याण निहित होता है। जब हम मोह माया रूपी संसार के अंधकार में डूबे होते हैं तो हमें संत ही इस अंधकार को दूर करने के लिए सत्संग रूपी प्रकाश पुंज से परिचित कराते हैं। संतों के संपर्क में रहने पर गलत राह पर चलने वाले लोग भी अपनी राह बदल देते हैं। अगर संतों की कृपा हो जाए तो अज्ञानी भी ज्ञानी बन जाता है। इस दौरान प्रज्ञा सिंह, पिंकी, पूजा, चाहत पांडेय, सोनाली पांडेय, संत बिलास सिंह, प्रदीप पांडेय, अंगद यादव, विनोद गुप्ता, जनार्दन सिंह रहे।
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