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डीजल के दामों में वृद्धि से हार्वेस्टर संचालकों ने बढ़ाया किराया

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कंदवा। डीजल की मूल्य वृद्धि का सीधा असर गेहूं की कटाई पर पड़ रहा है। खेत में खड़ी गेहूं की फसल काटने वाले हार्वेस्टर का किराया प्रति एकड़ 400 से 500 रुपये तक बढ़ गया है। जिससे गेहूं की हार्वेस्टर से कटाई और मड़ाई कराने वाले किसानों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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डीजल के बढ़ते दामों ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दी है। खेती की सिंचाई तो पहले ही महंगी हो गई थी अब गेहूं की कटाई पर भी महंगाई की मार स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। गेहूं की कटाई के लिए किसानों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं की कटाई 400 से 500 रुपये प्रति एकड़ महंगी हो गई है। बड़े किसान हार्वेस्टर का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं छोटे और मझोले किसान थ्रेसर के सहारे मड़ाई कर रहे हैं। पिछले साल मजदूर के साथ थ्रेसर मालिक छह से सात किलो प्रति कुंतल लेते थे लेकिन इस वर्ष यह बढ़ कर 13 से 15 किलोग्राम हो गया है। डीजल की मूल्य वृद्धि का सीधा असर गेहूं की कटाई पर भी पड़ा है।खेत में खड़ी गेहूं की फसल काटने वाले हार्वेस्टर का किराया प्रति एकड़ 400 से 500 रुपये तक बढ़ गया है।जिससे किसान परेशान हैं।किसानों ने बताया कि एक वर्ष पहले तक हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई का किराया प्रति एकड़ 1200 से 1300 रुपये था।इस वर्ष हार्वेस्टर से कटाई कराने का किराया प्रति एकड़ 1700 सौ से 1800 रुपये एकड़ हो गया है। किसानों को महंगे खाद- बीज के बाद अब महंगी कटाई कराने में काफी नुकसान हो रहा है। वहीं हार्वेस्टर चालक कहते हैं कि डीजल के दाम बढ़ने से अब रेट बढ़ाना हमारी मजबूरी है। किसान ज्ञानचंद्र सिंह,नरेन्द्र सिंह,नागेन्द्र सिंह,शंकर सिंह,बैरिस्टर यादव,रमाशंकर सिंह, संजीत सिंह पप्पू आदि ने बताया कि महंगाई का असर अब गेहूं की कटाई पर भी पड़ रहा है।
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