लोगों में बढ़ी दहशत
शनिवार को प्रति घंटे दस सेमी का बढ़ाव कुछ थमा और रविवार को गंगा तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने लगी। रविवार की सुबह आठ बजे तक गंगा का जल स्तर 70. 19 मीटर रहा। वहीं दोपहर बाद दो बजे गंगा का जल स्तर बढ़कर 70. 70 मीटर हो गया। इस तरह गंगा अपने चेतावनी बिंदू 70.262 मीटर से उपर हो गई। अब धीरे-धीरे गंगा खतरे की निशान की तरफ बढ़ रही हैं। जिले में गंगा के खतरे का बिंदू 71.262 मीटर है। वहीं जिले में बाढ़ का अधिकतर बिंदू 73.901 मीटर है।
यहां तक वर्ष 1978 में आई बाढ़ के दौरान गंगा का जल स्तर पहुंचा था। इसके पहले शनिवार को गंगा का जल स्तर 68.94 मीटर रहा, जबकि शुक्रवार को 65.86 मीटर गंगा का जल स्तर रहा। गंगा में यह बढ़ाव इस वर्ष चौथी बार देखने को मिला है। पिछले दिनों जलस्तर बढ़कर 69 मीटर तक पहुंचा था। जल स्तर बढ़ने से गंगा का जल तट से निकल कर खेतों तक पहुंच गया है। इससे तटवर्ती इलाके के लोग ऊंचे स्थानों पर पहुंचने लगे हैं।
चहनियां पीडीडीयू नगर मार्ग पर रौना गांव के समीप गंगा की स्थिति भयावह दिख रही र्है। गंगा का पानी खेतों तक पहुंच गया है और रोड पार करने को आतुर दिख रहा है। इसे ग्रामीणों में दहशत है। टांडाकला संवाददाता के अनुसार गंगा किनारे बसे महुअर कला, विजई के पूरा, गणेश पूरा, चकरा, सोनबरसा, टांडाकला, टांडा खुर्द, सरौली, महमदपुर, तिरगांवा, भूसौला, बड़गावां, नादी निधोरा आदि गांव के खेतों तक पानी पहुंच गया है। इससे किसान परेशान हैं।
बाढ़ के पानी को निहारते ग्रामीण।
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जिला प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता देने की मांग
मां गंगा के जल स्तर बढ़ने से लोगों मे दहशत है। रविवार को पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने जिला प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता पहुंचाने की अपील की। कहा कि जो प्रभावित व्यक्ति है, वे किसी भी रूप में राहत सहायता से वंचित न रहें, इसका ध्यान रखा जाए।
पूर्व सांसद ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा राहत वितरण तथा जो लोग पानी से घिरे हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में तत्परता करनी चाहिए। बाढ़ के पानी से घिरे हुए गांवों के लोगों के लिए स्वच्छ पीने का पानी पहुंचाने की आवश्यकता है। सूखा खाद्य वितरित कराने की भी आवश्यकता है। वहीं बीमार व जरूरत मंद लोगों को इस कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग को पहल करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।