पीडीडीयू नगर। रोशनी का त्योहार दीपावली कुम्हारों के लिए भी आशा की नई किरण लेकर आया है। कुम्हार अच्छे दिनों की आस में लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां, दीये और खिलौने गढ़ने में जुटे हैं। ईंधन और मिट्टी महंगा होने की वजह से थोड़ी सी दिक्कत हो रही है लेकिन कोरोना का प्रभाव कम होने से कुम्हारों को आशा है कि व्यापार अच्छा होगा।
श्रीराम के लंका विजय कर अयोध्या वापसी की खुुशी में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को घरों को रोशन कर खुुशी मनाई जाती है। इस दिन घर घर लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है और घर का कोना-कोना रोशन किया जाता है। कोरोना ने सभी त्योहारों को फीका कर दिया है। पिछले वर्ष मिट्टी के दीपक, खिलौने और गणेेेश लक्ष्मी की मूर्तियों की बिक्री पर असर पड़ा था। कोरोना का प्रभाव कम होने की वजह इस वर्ष कुम्हारों को आशा है कि अच्छी बिक्री होगी और इससे उनका त्योहार भी अच्छा होगा।
पिछले वर्ष के मुकाबले अच्छा होने की उम्मीद है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मां काली, गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों के आर्डर अधिक मिले हैं। इससे कुछ लाभ हो सकता है। अजय प्रजापति
पिछले वर्ष सार्वजनिक रूप से काली पूजा और गणेेश पूजा करने पर रोक लगी थी। इस वर्ष कोरोना की कमी से पूजा की आश जगी है। इसी वजह से मूर्तियां बनाने का आर्डर भी मिला है। हालांकि यह भी उम्मीद से कम है। फिर भी हम लोग बेहतरी की आश में लगे हैं। मेवा लाल
मिट्टी की कीमत और जलावनी लकड़ी की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इससे दिक्कत हो रही है। मूर्तियों, दीपक और खिलौनों की कीमत भी बढ़ी है। विनोद
दीपावली की तैयारी में हम लोग लगे हुए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले अच्छे व्यवसाय की उम्मीद है। इसी वजह से अधिक मेहनत कर रहे हैं। हालांकि जिस तरह फिर से कोरोना का प्रभाव बढ़ रहा है, उससे डर लग रहा है। भोला