चकिया के गरला में खेतों के मेड़ से होकर गुजरते छात्र-छात्राएं। संवाद
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क्षेत्र के गरला गांव में पांच वर्ष पूर्व राजकीय हाईस्कूल खोला गया था लेकिन अभी तक विद्यालय पहुंचने का रास्ता नहीं बनाया गया है। ऐसे में छात्र-छात्राएं खेतों की मेड़ से होकर विद्यालय जाने को विवश हैं। इसके अलावा विद्यालय का भवन भी अब तक अधूरा है। विद्युतीकरण भी नहीं हुआ है। स्कूल जाने के लिए ग्रामीण खेत से रास्ता के लिए तैयार हैं लेकिन प्रशासन ही पहल नहीं कर रहा है।
स्कूल की स्थापना होने से इस गांव के ग्रामीणों में शिक्षा के प्रसार को लेकर आशा की किरण उपजी थी। विद्यालय में 101 छात्र-छात्राओं ने नामांकन भी कराया है लेकिन विद्यालय तक आने व जाने का मार्ग नहीं बनाया गया है।चकिया-नौगढ़ मुख्य सड़क से विद्यालय की दूरी करीब आधा किलोमीटर है। विद्यालय जाने के लिए छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकों को खेतों की मेड़ से गुजरना पड़ रहा है। विद्यालय तक रास्ता देने के संबंध में स्थानीय ग्रामीण धीरज श्रीवास्तव कहते हैं कि कायस्थ समाज के लोग भूमि का सीमांकन कराने के बाद अपनी जमीन से रास्ता देने को तैयार हैं लेकिन प्रशासन पहल नहीं कर रहा है। वहीं पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी विद्यालय का भवन आधा अधूरा है और विद्यालय का विद्युतीकरण भी नहीं हुआ है। इससे अभिभावकों में रोष है। विद्यालय की प्रधानाचार्य विद्योत्तमा श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यालय तक संपर्क मार्ग नाहोने से छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है। इस संबंध में अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।